उत्तराखंड में कल से शुरू होगा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान: बीएलओ बांटेंगे गणना प्रपत्र; आधार नंबर वैकल्पिक, मैदानी जिलों में मतदाताओं को खोजना बड़ी चुनौती

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देहरादून: उत्तराखंड में मतदाता सूचियों को त्रुटिहीन और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) अभियान के लिए निर्वाचन तंत्र ने अपनी सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। सोमवार से प्रदेशभर में बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना प्रपत्र वितरित कर इस वृहद अभियान की विधिवत शुरुआत करेंगे। इस अभियान के तहत निर्वाचन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती देहरादून और ऊधम सिंह नगर समेत चार मैदानी जिलों में वर्ष 2003 की मतदाता सूची में शामिल मूल मतदाताओं को खोजने की रहेगी, क्योंकि प्री-एसआईआर चरण में इन्हीं क्षेत्रों में सबसे कम मैपिंग दर्ज की गई है।

8.81 लाख मतदाताओं का अब तक सुराग नहीं; चार मैदानी जिलों में मैपिंग की स्थिति कमजोर

प्री-एसआईआर (Pre-SIR) के तहत प्रदेश में हुई मैपिंग के आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें, तो राज्य में कुल 88.93 प्रतिशत मतदाताओं की ही मैपिंग पूरी हो पाई है। वर्तमान में करीब 8.81 लाख मतदाता ऐसे हैं, जिनका अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। मैदानी जनपदों में मैपिंग का ग्राफ इस प्रकार रहा है:

  • देहरादून: सबसे कम मात्र 80.38 प्रतिशत मैपिंग।

  • ऊधम सिंह नगर: केवल 83.53 प्रतिशत मैपिंग।

  • हरिद्वार: 89.36 प्रतिशत मैपिंग।

  • नैनीताल: 91.75 प्रतिशत मैपिंग।

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अन्य राज्यों के अनुभवों और तकनीकी आकलन के अनुसार, मैपिंग से छूटे हुए इन तकरीबन 50 प्रतिशत मतदाताओं के दिवंगत (मृत्यु) होने की संभावना अधिक जताई जा रही है, जबकि शेष जीवित मतदाताओं को धरातल पर ढूंढना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा।

18.54 लाख मतदाताओं के नाम विसंगति के दायरे में; भेजे जाएंगे नोटिस

पुनरीक्षण के शुरुआती चरण में एक और बड़ा खुलासा हुआ है कि जिन मतदाताओं की मैपिंग सफलता पूर्वक की जा चुकी है, उनमें से 18.54 लाख (कुल श्रेणी का 26.19 प्रतिशत) मतदाता ऐसे हैं जिनके विवरण में गंभीर तकनीकी विसंगतियां हैं। इनमें या तो नाम की स्पेलिंग गलत है, अथवा उनके माता-पिता या दादा की आयु के बीच का अंतर प्राकृतिक नियमों के विपरीत बहुत कम या अत्यधिक दर्ज है। निर्वाचन विभाग ऐसे सभी विसंगति वाले मतदाताओं को चिन्हित कर विधिक नोटिस जारी करने जा रहा है।

मतदाता ध्यान दें: गणना प्रपत्र भरते समय इन बातों का रखें विशेष ख्याल

बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर दिए जाने वाले गणना प्रपत्र को भरते समय आम नागरिकों को अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है:

  • बायां भाग (प्रिंटेड विवरण): प्रपत्र के बाएं हिस्से में वर्तमान वोटर लिस्ट के अनुसार मतदाता का नाम, माता-पिता का नाम, आयु, पता और फोटो पहले से प्रिंटेड रहेगी। साथ ही एक क्यूआर (QR) कोड होगा, जिसे स्कैन कर बीएलओ सारा डाटा देख सकेंगे। यहाँ मतदाता को वर्ष 2003 की वोटर लिस्ट के अनुसार अपना सही नाम लिखना होगा। यदि नाम पुरानी सूची में नहीं था, तो यह कॉलम खाली छोड़ना होगा।

  • दायां भाग (नवीनतम विवरण): इस भाग में मतदाता को अपनी नवीनतम पासपोर्ट साइज फोटो चस्पा करनी होगी। यदि मतदाता का स्वयं का नाम 2003 की सूची में नहीं है, परंतु उसके माता-पिता, दादा-दादी या नाना-नानी में से किसी का भी नाम दर्ज था, तो उसे प्रपत्र में बनी सारणी में उनका विवरण सही-सही अंकित करना होगा।

  • अनिवार्य व वैकल्पिक विवरण: प्रपत्र के निचले हिस्से में जन्मतिथि, माता-पिता या पति-पत्नी का विवरण देना अनिवार्य है। इस प्रपत्र में पहचान के तौर पर [Aadhaar Redacted] देना पूरी तरह से वैकल्पिक (Optional) रखा गया है। प्रपत्र के अंत में मतदाता के हस्ताक्षर होने अनिवार्य हैं, जिसके बाद बीएलओ भी हस्ताक्षर कर एक रसीद प्रति मतदाता को सौंपेगा।

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इन परिस्थितियों में मतदाता सूची से काट दिए जाएंगे नाम

निर्वाचन विभाग ने प्रपत्र जमा न करने या लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त विधिक नियम तय किए हैं। निम्नलिखित श्रेणियों के लोगों के नाम आगामी मतदाता सूची में शामिल नहीं किए जाएंगे:

  1. जिनका नाम देश या राज्य के किसी अन्य स्थान की वोटर लिस्ट में पहले से ही सूचीबद्ध हो।

  2. जिनकी मृत्यु हो चुकी हो या जो उत्तराखंड के अपने मूल पते से हमेशा के लिए किसी दूसरे स्थान पर विस्थापित हो गए हों।

  3. जिनके संबंध में भौतिक सत्यापन के दौरान कोई जानकारी या सुराग नहीं मिल पा रहा हो।

  4. हस्ताक्षर न करने पर कार्रवाई: जो मतदाता बीएलओ के सामने गणना प्रपत्र पर विधिक रूप से हस्ताक्षर करने या इसे भरने से साफ मना करेंगे, उनके नाम भी बिना किसी देरी के मतदाता सूची से पूरी तरह हटा (काट) दिए जाएंगे।

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