
राजू अनेजा,देहरादून। विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही कई नेताओं की राजनीतिक बेचैनी खुलकर सामने आने लगी है। पिछले कई वर्षों तक जनता से दूरी बनाए रखने वाले जनप्रतिनिधि अब अचानक सक्रिय नजर आने लगे हैं। कहीं अधिकारियों के साथ बैठकें हो रही हैं, कहीं अधूरे विकास कार्यों का निरीक्षण किया जा रहा है, तो कहीं गांव-गांव जाकर जनता से सीधा संपर्क साधा जा रहा है।
भाजपा हाईकमान के सख्त निर्देशों के बाद विधायकों की दून से लेकर दिल्ली तक हाजिरी बढ़ गई है। संगठन ने साफ संकेत दे दिए हैं कि इस बार टिकट सिर्फ चेहरे देखकर नहीं, बल्कि जनता के बीच पकड़ और जीत की संभावना के आधार पर दिया जाएगा। यही वजह है कि कई नेता अब अपने राजनीतिक भविष्य को बचाने के लिए पूरी ताकत झोंकते दिखाई दे रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी द्वारा कराए गए अंदरूनी सर्वे में एक दर्जन से अधिक विधायकों के खिलाफ जनता की नाराजगी सामने आई है। कई क्षेत्रों में लोगों ने शिकायत की कि चुनाव जीतने के बाद विधायक क्षेत्र में नजर ही नहीं आए। यही रिपोर्ट अब कई नेताओं की धड़कन बढ़ाने का काम कर रही है।
हाईकमान ने सभी विधायकों को 31 अक्तूबर तक जनता के बीच सक्रिय रहने, लंबित विकास कार्यों को पूरा कराने और लोगों की समस्याओं के समाधान पर फोकस करने के निर्देश दिए हैं। नवंबर और दिसंबर में होने वाले नए सर्वे यह तय करेंगे कि किस विधायक का टिकट सुरक्षित रहेगा और किसकी राजनीति पर संकट गहरा सकता है।
इधर, मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami भी लगातार गढ़वाल और कुमाऊं के दौरों में सक्रिय हैं। सरकार तेजी से विकास योजनाओं को मंजूरी देकर चुनावी माहौल अपने पक्ष में करने की कोशिश में जुटी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार चुनाव में जनता सिर्फ वादों पर नहीं, बल्कि पांच साल के कामकाज का हिसाब मांगने के मूड में दिखाई दे रही है। ऐसे में जिन नेताओं ने समय रहते जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत नहीं की, उनके लिए टिकट बचाना आसान नहीं होगा।
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