आस्था का शंखनाद: ‘पंज प्यारों’ की अगुवाई में गोविंदघाट से रवाना हुआ हेमकुंड साहिब यात्रा का पहला जत्था, कल सुबह 10 बजे खुलेंगे कपाट

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चमोली (गोविंदघाट): उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में स्थित विश्व प्रसिद्ध सिख तीर्थस्थल श्री हेमकुंड साहिब यात्रा-2026 का गुरुवार को बेहद श्रद्धा, पारंपरिक उत्साह और धार्मिक उल्लास के साथ विधिवत आगाज हो गया है। देश-विदेश से पहुंचे हजारों सिख श्रद्धालुओं की मौजूदगी में यात्रा के पहले जत्थे को गोविंदघाट गुरुद्वारे से अरदास के बाद रवाना किया गया। इस दौरान पूरा गोविंदघाट क्षेत्र “जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” के गगनभेदी जयकारों और आर्मी बैंड की मधुर धुनों से गुंजायमान हो उठा, जिससे पूरी अलकनंदा घाटी आध्यात्मिक रंग में सराबोर नजर आई।

‘पंज प्यारों’ की अगुवाई में घांघरिया की ओर बढ़े कदम

यात्रा की शुरुआत सिख परंपरा के अनुसार ‘पंज प्यारों’ की अगुवाई में हुई, जो हाथों में पवित्र निशान साहिब लेकर जत्थे के आगे चल रहे थे। देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में गुरुवाणी का कीर्तन करते हुए मुख्य मार्ग पर आगे बढ़े। पहले जत्थे में शामिल बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं में 15,000 फीट की कठिन पर्वतीय चढ़ाई को लेकर गजब का उत्साह देखा गया। यह जत्था आज शाम तक अपने पहले पड़ाव घांघरिया पहुंचेगा। इसके बाद शुक्रवार (23 मई 2026) की अलसुबह श्रद्धालु अंतिम 6 किलोमीटर की बर्फानी चढ़ाई पूरी कर मुख्य गुरुद्वारे पहुंचेंगे, जहां सुबह ठीक 10:00 बजे विशेष अरदास और विधि-विधान के साथ श्री हेमकुंड साहिब के कपाट इस वर्ष के ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए जाएंगे।

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प्रशासन की कड़ी मुस्तैदी, तीर्थयात्रियों के लिए गाइडलाइन जारी

समुद्र तल से अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित होने के कारण हेमकुंड साहिब में मौसम का मिजाज पल-पल बदलता रहता है। ऊंचाई वाले इलाकों में कड़ाके की ठंड और बर्फबारी की संभावना को देखते हुए चमोली जिला प्रशासन और श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह मेडिकल कैंप, एसडीआरएफ (SDRF), पुलिस सहायता केंद्र और राहत दल तैनात किए गए हैं। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे अनिवार्य रूप से अपना ऑनलाइन पंजीकरण (Registration) करवाएं और साथ में पर्याप्त गर्म कपड़े, रेनकोट व जरूरी दवाइयां अवश्य रखें।

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स्थानीय आर्थिकी को मिलेगी नई रफ्तार

मान्यता है कि सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने सात पहाड़ियों से घिरे इस पवित्र स्थान पर पूर्व जन्म में घोर तपस्या की थी, जिसके चलते इस धाम का सिख इतिहास में सर्वोच्च महत्व है। हेमकुंड साहिब यात्रा के शुभारंभ से चमोली जिले के स्थानीय व्यापारियों, होटल व्यवसायियों, ढाबा स्वामियों, टैक्सी ऑपरेटरों समेत घोड़ा-खच्चर और डंडी-कंडी संचालकों में भारी खुशी है। चारधाम यात्रा के साथ ही इस यात्रा के शुरू होने से उत्तराखंड के पर्यटन और स्थानीय आर्थिकी को इस सीजन में एक नई रफ्तार मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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