
राजू अनेजा,काशीपुर।उत्तराखंड की सियासत में उबाल अब खुलकर सड़क पर आ गया है। किच्छा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला, रुद्रपुर के मेयर विकास शर्मा, गदरपुर के ग्रोवर के बाद अब काशीपुर के मेयर दीपक बाली ने भी भाजपा विधायक अरविंद पांडे के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सीधे-सीधे उन्हें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विकास के रास्ते में बाधा डालने वाला गिरोह करार दे दिया है।
नगर निगम सभागार में आयोजित तीखी पत्रकार वार्ता में दीपक बाली ने बिना नाम घुमाए कहा—
“जिस घर से आबो-दाना मिला, उसी घर को जलाकर तापना अब कुछ लोगों की आदत बन चुकी है।”
“धामी चुनाव हारे नहीं, हरवाए गए— षड्यंत्र आज भी जारी”
मेयर बाली ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 2022 का चुनाव हारे नहीं थे, बल्कि उन्हें एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत हरवाया गया। उस वक्त जो साजिश रची गई थी, वही गिरोह आज भी सक्रिय है और लगातार मुख्यमंत्री को कमजोर करने में जुटा है।
उन्होंने याद दिलाया कि 2022 में धामी सेनापति बनकर भाजपा को भारी बहुमत से विजय दिलाते हैं, लेकिन खुद उस राजनीतिक युद्ध में घायल हो जाते हैं। इसके बावजूद पार्टी हाईकमान ने उन पर भरोसा जताया और एक बार फिर उत्तराखंड की बागडोर उनके हाथों में सौंपी— उस प्रदेश की कमान, जो बाल्यावस्था से निकलकर युवावस्था की ओर बढ़ रहा है।
“24 में से 16-16 घंटे काम करने वाले सीएम को घेरने की साजिश”
दीपक बाली ने कहा कि ऐसा मुख्यमंत्री, जो दिन के 24 घंटे में से 16-16 घंटे काम करता है, उसे योजनाबद्ध तरीके से विवादों में घसीटा जाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर रहकर विपक्ष की भूमिका निभाने वाले लोग हर मुद्दे को हथियार बनाकर सरकार को बदनाम करने में जुटे हैं।
अंकिता मामला हो या किसान सुखवंत सिंह केस— “राजनीति की आग भड़काई”
मेयर बाली ने साफ कहा कि अंकिता हत्याकांड हो या किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या मामला, विपक्ष के साथ-साथ पार्टी के ही कुछ वरिष्ठ नेताओं ने मिलकर आग में घी डालने का काम किया।
लेकिन मुख्यमंत्री धामी ने हर साजिश पर पानी फेरते हुए अंकिता के परिजनों से सीधे संवाद किया और उनकी मांग पर सीबीआई जांच तक की सहमति दी— यह उनकी संवेदनशीलता और नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है।
“गदरपुर से काशीपुर तक ज़हर घोलने की कोशिश”
दीपक बाली ने आरोप लगाया कि गदरपुर विधायक अरविंद पांडे ने अपने क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि काशीपुर को भी ‘हल्दीघाटी का मैदान’ बनाने की कोशिश की।
उन्होंने कहा—
“मैं उनका सम्मान करता हूं, उन्हें बड़ा भाई मानता हूं। लेकिन काशीपुर आकर जिस तरह की भाषा और राजनीति की गई, वह काबिले-बर्दाश्त नहीं है।”
बाली ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि काशीपुर में राजनीति की दशा-दिशा को दूषित करने का प्रयास हुआ, तो उसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।
“धामी पर तंज क्यों, जब 70 सीटों पर विकास बह रहा?”
मेयर ने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री धामी प्रदेश की 70 विधानसभाओं में एक साथ विकास की गंगा बहा रहे हैं, तब उन पर तंज कसना किस एजेंडे का हिस्सा है?
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री यदि प्रदेश के हित में दिल्ली जाकर केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात करते हैं, तो इसे गलत नजरिए से पेश किया जाता है, ताकि जनता भ्रमित हो।
बलराज पासी पर भी सवाल— “धृतराष्ट्र मत बनिए”
पत्रकार वार्ता में दीपक बाली ने पूर्व सांसद बलराज पासी का नाम लेते हुए बड़ा सवाल दागा।
उन्होंने कहा—
“बलराज पासी अरविंद पांडे को अपना पुत्र मानते हैं, लेकिन इस पूरे मामले में वे धृतराष्ट्र बने बैठे हैं।”
महाभारत का उदाहरण देते हुए बाली ने कहा कि धृतराष्ट्र पुत्र मोह में असहाय हो गए थे, लेकिन बलराज पासी असहाय न बनें।
“साहस करें और साफ बताएं कि वे किसके साथ हैं— पार्टी, सरकार और मुख्यमंत्री के साथ या षड्यंत्रकारियों के साथ।”
तराई में उबाल, भाजपा के भीतर गहरी दरार
एक के बाद एक सामने आ रहे विरोध के स्वर यह साफ संकेत दे रहे हैं कि अरविंद पांडे को लेकर भाजपा के भीतर असंतोष अब फूट चुका है।
तराई की राजनीति में उठता यह तूफान अब नेतृत्व के लिए चेतावनी की घंटी बन चुका है।
अब देखना यह है कि पार्टी नेतृत्व इस अंदरूनी संग्राम को कैसे संभालता है— संवाद से या निर्णायक कार्रवाई से।
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