हरिद्वार में स्थापित हुआ विश्व का सबसे बड़ा पारद शिवलिंग: 5211 किलो वजनी पारदेश्वर महादेव की हुई प्राण प्रतिष्ठा; लिम्का और एशियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज

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हरिद्वार, 18 जून 2026: धर्मनगरी हरिद्वार में बहादराबाद टोल प्लाजा के पास स्थित श्री साईं शिव गंगा धाम में एक ऐतिहासिक और अलौकिक धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। यहाँ वैदिक मंत्रोच्चार और भव्य संत समागम के बीच विश्व के सबसे बड़े पारद (पारे) शिवलिंग की विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा की गई। दावा किया गया है कि $5211$ किलोग्राम वजनी यह पारद शिवलिंग पूरे विश्व में आकार और वजन के मामले में अद्वितीय है। इस अलौकिक शिवलिंग को ‘लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ तथा ‘एशियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में दुनिया के सबसे बड़े पारे के शिवलिंग के रूप में आधिकारिक तौर पर दर्ज कर लिया गया है।

4 साल की कठिन साधना से दक्षिण के कारीगरों ने किया तैयार

श्री साईं शिव गंगा धाम के मैनेजिंग ट्रस्टी और प्रसिद्ध उद्योगपति राजीव बंसल द्वारा निर्मित इस धाम में इस दिव्य पारदेश्वर शिवलिंग की स्थापना के पीछे लंबी और कठिन वैज्ञानिक व आध्यात्मिक प्रक्रिया रही है:

  • निर्माण काल: इस अनूठे शिवलिंग को बनाने का कार्य वर्ष २०२१ में शुरू किया गया था।

  • रस विद्या का चमत्कार: दक्षिण भारत के विद्वान ब्राह्मणों और कुशल कारीगरों ने पारे जैसी तरल धातु को एकत्रित कर, ऋषियों की प्राचीन रस विद्या के कठिन परिश्रम से इसे ठोस रूप प्रदान किया।

  • भव्य गर्भगृह: धाम के एक विशाल हॉल में शिरडी के साईं बाबा की भव्य मूर्ति स्थापित है, जिसके ठीक सामने इस पारदेश्वर शिवलिंग को प्रतिष्ठित किया गया है। इसके साथ ही परिसर में ब्रह्मा, विष्णु, महेश और लक्ष्मी-गणेश सहित सभी प्रमुख देवी-देवताओं की विग्रह मूर्तियां भी लगाई गई हैं।

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करोड़ों की लागत से हुआ निर्माण; गिनीज बुक की तैयारी

विज्ञान और ध्यान के अंतर्संबंधों को ध्यान में रखकर निर्मित यह शिवलिंग अत्यंत कीमती है, क्योंकि पारा एक बहुमूल्य और उच्च घनत्व (High Density) वाली धातु है। हालांकि, ट्रस्टियों ने इसकी निर्माण लागत का खुलासा न करते हुए केवल भगवान शिव को ‘अनमोल’ बताया, लेकिन इसके निर्माण में करोड़ों रुपये खर्च होने का अनुमान है।

मुख्य ट्रस्टी राजीव बंसल ने बताया कि दोनों वैश्विक रिकॉर्ड बुक से ट्रस्ट को प्रमाण पत्र (Certificate) प्राप्त हो चुका है और अब इसे ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में दर्ज कराने की विधिक प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि मानव कल्याण, विश्व शांति और सनातन संस्कृति के संवर्धन के उद्देश्य से स्थापित यह धाम आने वाले समय में देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनेगा।

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संत समागम: शीर्ष महामंडलेश्वरों और शंकराचार्य ने की महिमा संस्तुति

प्राण प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक अवसर पर देश के शीर्ष संतों का समागम हुआ, जिन्होंने पारदेश्वर महादेव की महिमा का गुणगान किया:

  • आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज (निरंजन पीठाधीश्वर): उन्होंने कहा कि पारे को बांधकर शिवलिंग का रूप देना ऋषियों के विज्ञान का चमत्कार है। गुरु रघुनाथ यमूल की प्रेरणा से राजीव बंसल ने सनातन धर्म को यह अद्भुत उपहार दिया है। आगामी कांवड़ मेले में आने वाले करोड़ों भक्तों में से लाखों श्रद्धालु इसके दर्शन कर धन्य होंगे।

  • जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वश्रम महाराज: उन्होंने इसे मानवता के आध्यात्मिक उत्थान और सनातन धर्म के संरक्षण का दिव्य अभियान बताया।

  • आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज (जूना पीठाधीश्वर): उन्होंने कहा कि पारद शिवलिंग की उपासना से कलियुग में शीघ्र फल प्राप्त होता है और यह रोग, शोक तथा दरिद्रता का नाश करने वाला है।

  • साध्वी ऋतम्भरा दीदी: उन्होंने नारी शक्ति और राष्ट्र निर्माण पर ओजस्वी उद्बोधन देते हुए कहा कि इस स्थापना से हरिद्वार की महिमा और बढ़ेगी।

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इस पावन अवसर पर महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रवींद्र पुरी महाराज, श्रीमहंत भगतराम महाराज, निर्मल अखाड़े के स्वामी ज्ञानदेव महाराज, महंत विष्णु दास तथा विश्व हिंदू परिषद (विएचपी) के संरक्षक दिनेश चंद्र सहित कई गणमान्य संत और सामाजिक पदाधिकारी उपस्थित रहे। संतों ने देश के युवाओं को अपनी वैज्ञानिक सनातन संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने के इस प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

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