मुख्यमंत्री धामी के फैसले का किया स्वागत, कहा—तंबाकू की गिरफ्त से युवाओं को बचाना जरूरी, स्वस्थ परिवार और नशामुक्त समाज की दिशा में बढ़े कदम
राजू अनेजा काशीपुर। तंबाकू और गुटखे की लत किसी एक व्यक्ति की समस्या नहीं, बल्कि पूरे परिवार की सेहत, आर्थिक स्थिति और मानसिक शांति से जुड़ा गंभीर सवाल है। इसी मुद्दे को लेकर dbali कंपनी की डायरेक्टर एवं समाजसेवी उर्वशी दत्त बाली ने उत्तराखंड सरकार के तंबाकू उत्पादों पर एक साल के प्रतिबंध संबंधी फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस निर्णय को जनस्वास्थ्य और नशामुक्त समाज की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि तंबाकू की लत से मुक्ति के लिए लोगों को जागरूक करना और युवाओं को इसकी गिरफ्त में आने से बचाना बेहद जरूरी है।
उर्वशी दत्त बाली ने अपने संदेश में कहा कि तंबाकू का सेवन कुछ पलों के लिए राहत का एहसास करा सकता है, लेकिन धीरे-धीरे यही आदत इंसान को निकोटीन पर निर्भर बना देती है। जब व्यक्ति बार-बार तंबाकू लेने के लिए मजबूर महसूस करने लगे, तो यह समझना चाहिए कि मामला महज शौक का नहीं, बल्कि लत का है। उन्होंने कहा कि समाज को इस समस्या को गंभीरता से समझने और तंबाकू छोड़ने वालों का सहयोग करने की जरूरत है।
‘शुरुआती बेचैनी से न घबराएं, लत से आजादी की ओर बढ़ाएं कदम’
उर्वशी दत्त बाली ने कहा कि तंबाकू छोड़ने का फैसला करना जितना जरूरी है, उस पर टिके रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। निकोटीन की लत वाले व्यक्ति को तंबाकू छोड़ने के शुरुआती दिनों में चिड़चिड़ापन, बेचैनी, गुस्सा, एकाग्रता में परेशानी और बार-बार तंबाकू लेने की इच्छा हो सकती है। ऐसे समय में कई लोग दोबारा सेवन शुरू कर देते हैं और लत से बाहर निकलने की कोशिश अधूरी रह जाती है।
उन्होंने कहा कि इन लक्षणों को इच्छाशक्ति की कमी समझने के बजाय निकोटीन छोड़ने की प्रक्रिया का हिस्सा समझना चाहिए। सही मार्गदर्शन, परिवार के सहयोग और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय मदद से इस चुनौती का सामना किया जा सकता है। समय के साथ निकोटीन की तलब और इससे जुड़े लक्षण कम हो सकते हैं।
उनका संदेश साफ है कि कुछ समय की परेशानी से घबराकर अपनी सेहत के साथ समझौता नहीं करना चाहिए। तंबाकू छोड़ने की दिशा में उठाया गया कदम व्यक्ति के साथ उसके परिवार के भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
‘पाउच के भरोसे नहीं, अपने आत्मबल के सहारे जिएं’
समाजसेवी उर्वशी दत्त बाली ने तंबाकू की लत के मनोवैज्ञानिक पहलू पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि कई लोग तनाव, काम के दबाव या मनोदशा में बदलाव के दौरान तंबाकू का सहारा लेने लगते हैं। बार-बार सेवन करने से दिमाग निकोटीन का आदी हो सकता है और व्यक्ति को लगता है कि इसके बिना वह सामान्य महसूस नहीं कर पाएगा।
उन्होंने कहा कि इस निर्भरता से बाहर निकलने के लिए केवल तंबाकू की उपलब्धता कम करना ही नहीं, बल्कि लोगों को इसके नुकसान समझाना और छोड़ने के लिए प्रेरित करना भी जरूरी है। स्वस्थ दिनचर्या, परिवार का सहयोग और विशेषज्ञों की सलाह इस दिशा में मददगार हो सकती है।
उर्वशी दत्त बाली के मुताबिक, तंबाकू छोड़ने का निर्णय व्यक्ति को अपनी सेहत और जीवनशैली पर दोबारा नियंत्रण पाने का अवसर देता है। इसलिए तंबाकू को तनाव का समाधान मानने के बजाय उससे बाहर निकलने का रास्ता तलाशना चाहिए।
युवाओं को तंबाकू की गिरफ्त से बचाना सबसे बड़ी चुनौती
उन्होंने कहा कि कम उम्र में तंबाकू और गुटखे का सेवन शुरू करना भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। कई बार दोस्ती, देखा-देखी और आसानी से उपलब्धता के चलते युवा इस आदत की शुरुआत कर देते हैं। बाद में यही आदत छोड़ना मुश्किल हो सकता है।
ऐसे में सरकार के प्रतिबंध के साथ अभिभावकों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। युवाओं को तंबाकू के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करना, उन्हें स्वस्थ गतिविधियों से जोड़ना और जरूरत पड़ने पर सहायता उपलब्ध कराना समय की मांग है।
उन्होंने कहा कि यदि नई पीढ़ी को तंबाकू की लत से बचाने के लिए अभी प्रभावी प्रयास किए जाएं, तो आने वाले वर्षों में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। प्रतिबंध का उद्देश्य तभी सार्थक होगा, जब नियमों का पालन हो और समाज भी इस मुहिम में अपनी जिम्मेदारी निभाए।
तंबाकू की लत से परिवार भी होते हैं प्रभावित
उर्वशी दत्त बाली ने कहा कि तंबाकू का नुकसान केवल सेवन करने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। इसके कारण होने वाली बीमारियां परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ा सकती हैं। इलाज पर खर्च, कामकाज पर असर और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां घर के दूसरे सदस्यों की चिंता भी बढ़ाती हैं।
उन्होंने कहा कि परिवार के किसी सदस्य को तंबाकू छोड़ने में परेशानी हो रही हो, तो उसे ताने देने या अपमानित करने के बजाय प्रोत्साहित करना चाहिए। लत से बाहर निकलने की प्रक्रिया में सहयोग और समझदारी बेहद अहम हैं। जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श लेना भी जरूरी है।
धामी सरकार के फैसले का स्वागत, नशामुक्त देवभूमि की अपील
उर्वशी दत्त बाली ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए जनहित से जुड़े ऐसे प्रयासों के साथ जागरूकता और प्रभावी क्रियान्वयन भी जरूरी है। उन्होंने प्रदेश की मातृशक्ति और आम जनता से अपील की कि वे तंबाकू के सेवन से दूर रहने, परिवार के सदस्यों को इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने और युवाओं को इस आदत से बचाने में अपनी भूमिका निभाएं।
उन्होंने कहा कि नशामुक्त उत्तराखंड का सपना तभी साकार हो सकता है, जब सरकारी प्रयासों के साथ समाज भी अपनी जिम्मेदारी समझे। तंबाकू छोड़ने की कोशिश कर रहे लोगों को सहयोग दिया जाए और नई पीढ़ी को स्वस्थ जीवन की ओर प्रेरित किया जाए।
उर्वशी दत्त बाली का संदेश—तंबाकू की तलब के सामने अपनी जिंदगी को छोटा मत पड़ने दीजिए। कुछ समय की परेशानी से घबराने के बजाय स्वस्थ भविष्य के लिए कदम बढ़ाइए, क्योंकि असली सुकून लत के सहारे नहीं, लत से आजादी में है।
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