‘पहाड़ की अपनी पार्टी को मिले अवसर’: उक्रांद नेता भुवन पहाड़ी का सरकार पर तीखा हमला, गिनाईं उत्तराखंड की 10 बड़ी पीड़ाएं

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गैरसैंण/देहरादून (9 मार्च 2026): उत्तराखंड में आगामी चुनावी सुगबुगाहट के बीच उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) ने मोर्चा खोल दिया है। दल के केंद्रीय संगठन मंत्री भुवन पहाड़ी ने राज्य की वर्तमान स्थिति पर गहरा क्षोभ प्रकट करते हुए जनता से राष्ट्रीय पार्टियों के बजाय क्षेत्रीय विकल्प को चुनने का आह्वान किया है। उन्होंने “उत्तराखंड की पीड़ा और हमारी आवाज़” के माध्यम से सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

भर्ती घोटाले और अंकिता भंडारी प्रकरण पर घेरा

भुवन पहाड़ी ने कहा कि राज्य सरकार ने लगातार दो कार्यकाल मिलने के बावजूद जनता की भावनाओं के साथ न्याय नहीं किया।

  • युवाओं का हक: उन्होंने आरोप लगाया कि UKSSSC पेपर लीक प्रकरण ने हजारों स्थानीय युवाओं का भविष्य अंधकारमय कर दिया और बाहरी लोगों को तरजीह देकर मूलनिवासी युवाओं का हक छीना गया।

  • अंकिता भंडारी हत्याकांड: उन्होंने अंकिता भंडारी की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि आज भी पूरा पहाड़ न्याय की उम्मीद में सवाल पूछ रहा है, लेकिन जवाब नदारद हैं।

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गाँवों का खाली होना और बुनियादी सुविधाओं का अभाव

उक्रांद नेता ने राज्य के ज्वलंत मुद्दों को उठाते हुए कहा कि आज देवभूमि कई मोर्चों पर संकट में है:

  1. जंगली जानवरों का आतंक: गाँवों में भय का माहौल है, जिससे कृषि और जनजीवन प्रभावित है।

  2. पलायन: मूलभूत सुविधाओं और सुरक्षा की कमी के कारण गाँव खाली होते जा रहे हैं।

  3. स्वास्थ्य सेवा: स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में गर्भवती महिलाओं का दम तोड़ना राज्य के लिए शर्मनाक है।

  4. भूमाफिया: प्रदेश की कीमती जमीनों पर भूमाफियाओं का कब्जा बढ़ता जा रहा है, जिससे मूल निवासियों की पहचान खतरे में है।

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संस्कृति और चुनावी शुचिता पर चोट

भुवन पहाड़ी ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर प्रहार करते हुए कहा कि चुनावों में शराब, मुर्गा और पैसा बांटकर जनमत को भ्रमित किया जाता है। उन्होंने यूसीसी (UCC) जैसे कानूनों को पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था के लिए खतरा बताते हुए कहा कि यह पहाड़ की मूल संस्कृति पर प्रहार है।


** Snapshot: उक्रांद का संकल्प**

मुख्य मुद्दे उक्रांद का दृष्टिकोण
भर्ती प्रक्रिया मूलनिवासी युवाओं को प्राथमिकता और पारदर्शिता।
कानून व्यवस्था महिला सुरक्षा और अंकिता भंडारी केस में पूर्ण न्याय।
क्षेत्रीय अस्मिता ‘पहाड़ की पार्टी-पहाड़ी सोच’ के साथ शासन।
चुनावी सुधार लालच और झूठे वादों से मुक्त राजनीति।

जनता से एकजुट होने की अपील

भुवन पहाड़ी ने अंत में भावुक अपील करते हुए कहा कि उत्तराखंड की अस्मिता, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा तभी संभव है जब पहाड़ की अपनी क्षेत्रीय पार्टी, उत्तराखंड क्रांति दल, को अवसर मिले। उन्होंने “जय देवभूमि, जय पहाड़ और जय उक्रांद” के नारों के साथ जनता से एकजुट होकर राष्ट्रीय पार्टियों को सबक सिखाने की बात कही।

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निष्कर्ष: उक्रांद का यह हमला चुनावी वर्ष में राजनीतिक तापमान को बढ़ाने वाला है। क्षेत्रीय अस्मिता और “पहाड़ी सोच” के इस एजेंडे ने निश्चित रूप से सत्तापक्ष और मुख्य विपक्षी दल के लिए नई चुनौतियां पेश कर दी हैं।

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