उत्तराखंड: अब डिग्री कॉलेज के प्राचार्य पढ़ाएंगे भी और लावारिस कुत्तों की गिनती भी करेंगे
देहरादून: उत्तराखंड में एक चौंकाने वाला सरकारी आदेश जारी हुआ है, जिसके तहत अब डिग्री कॉलेजों के प्राचार्यों को पढ़ाने के साथ-साथ अपने आसपास के क्षेत्र में घूम रहे लावारिस कुत्तों की गिनती करने की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
📋 आदेश और जिम्मेदारी
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नोडल अधिकारी: उत्तराखंड शासन ने इस अभियान के लिए प्रत्येक महाविद्यालय के प्राचार्य को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है।
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विश्वविद्यालय स्तर: विश्वविद्यालय स्तर पर यह जिम्मेदारी कुलसचिव को सौंपी गई है।
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उद्देश्य: संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा की ओर से 23 दिसंबर को जारी आदेश के अनुसार, यह कदम सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राज्य में लावारिस कुत्तों को नियंत्रित करने के उपायों के तहत उठाया गया है।
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रिपोर्टिंग: प्राचार्य को अपने संस्थान के आसपास लावारिस कुत्तों की गणना कर, उनके पुनर्वास के लिए क्या कार्रवाई की गई है या नहीं की गई है, इसकी जानकारी स्थानीय प्रशासन को मुहैया करानी होगी।
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शामिल संस्थान: यह आदेश शासकीय, सहायता प्राप्त अशासकीय और निजी महाविद्यालयों के प्राचार्यों पर लागू होता है।
😠 शिक्षाविदों ने जताई कड़ी आपत्ति
संयुक्त शिक्षा निदेशक की ओर से जारी इस आदेश को लेकर प्राफेसरों ने कड़ी आपत्ति दर्ज की है और इसे अपमानजनक बताया है:
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शिक्षकों का काम: शिक्षकों का कहना है कि उनका काम बच्चों को शिक्षा और ज्ञान देना है, न कि अध्यापन छोड़कर आवारा कुत्तों की गणना करना।
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गरिमा के खिलाफ: भारतीय शैक्षिक महासंघ के मंडल अध्यक्ष नरेंद्र तोमर का कहना है कि शिक्षक की ड्यूटी कुत्तों की गणना में लगाना और प्राचार्य को नोडल अधिकारी बनाना गरिमा के खिलाफ है और इससे पूरे शिक्षा जगत का अपमान हुआ है, जिसका विरोध किया जाएगा।
उधर, उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. एनपी खाली ने स्वीकार किया है कि निदेशालय से ऐसा आदेश जारी किया गया है, लेकिन उन्हें प्राचार्यों की ओर से कोई शिकायत नहीं मिली है।

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