उत्तराखंड: निजी स्कूलों द्वारा डोनेशन लेने पर मान्यता रद्द होगी, सरकार ने जारी किए सख्त निर्देश

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देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने निजी विद्यालयों द्वारा दाखिले के नाम पर डोनेशन या चंदा लेने पर सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि प्रदेश में संचालित किसी भी बोर्ड का निजी विद्यालय ऐसा करता पाया गया, तो उसकी मान्यता रद्द की जाएगी।

माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने राज्य के सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों (CEO) को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं।

🚫 डोनेशन और शुल्क वसूली पर नियम

निदेशक ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि सीबीएसई (CBSE) और आईसीएसई (ICSE) बोर्ड से संबद्ध निजी विद्यालयों के विरुद्ध लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। इन शिकायतों के मद्देनजर निम्नलिखित निर्देश दिए गए हैं:

  • शुल्क सीमा: निजी स्कूल केवल वही शुल्क वसूल कर सकेंगे, जो शासन की ओर से निर्धारित है।

  • अतिरिक्त शुल्क पर रोक: कोई भी समिति या विद्यालय छात्रों के दाखिले के उद्देश्य से प्रति व्यक्ति कोई अतिरिक्त शुल्क (डोनेशन/चंदा) नहीं ले सकेगा।

  • शुल्क के शीर्ष: शुल्क की वसूली केवल शिक्षा विभाग की ओर से निर्धारित शीर्षों में ही की जा सकेगी।

  • शुल्क संशोधन: शुल्क में किसी भी प्रकार का संशोधन बिना सक्षम प्राधिकारी अथवा निर्धारित प्रक्रिया की पूर्व स्वीकृति के नहीं किया जा सकेगा।

  • नियमों की बाध्यता: राज्य या केंद्र सरकार द्वारा फीस विनियमन को लेकर बनाए गए सभी अधिनियम और नियम सीबीएसई से संबद्ध विद्यालयों पर भी समान रूप से लागू होंगे (CBSE, 2018 की अधिसूचना के अनुरूप)।

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🖥️ वार्षिक रिपोर्ट वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य

पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है:

  • रिपोर्ट अनिवार्य: विद्यालयों को अपनी वार्षिक व्यापक सूचना रिपोर्ट तैयार करनी होगी।

  • अपलोड की समय सीमा: यह रिपोर्ट हर वर्ष 15 सितंबर से पहले विद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।

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रिपोर्ट में शामिल अनिवार्य जानकारियाँ:

  • विद्यालय का नाम, पता, संपर्क विवरण, संबद्धता की स्थिति।

  • अवसंरचना, शैक्षणिक कैलेंडर, शिक्षकों की योग्यता व प्रशिक्षण।

  • शैक्षणिक व खेल उपलब्धियां, पीटीए गतिविधियां और विद्यार्थियों की संख्या।

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⚠️ उल्लंघन पर कड़ी चेतावनी

शिक्षा विभाग ने चेतावनी दी है कि इन नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी और विद्यालय की मान्यता रद्द कर दी जाएगी।

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