₹20 हजार की रिश्वत का वीडियो वायरल, विधायक आदेश चौहान ने सिस्टम को कटघरे में किया खड़ा—आखिर यह हो क्या रहा है? देखिए पूरा वीडियो

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जसपुर में सियासी भूचाल“जीरो टॉलरेंस” बनाम जमीनी हकीकत—चुनावी साल में प्रशासन कठघरे में
राजू अनेजा, जसपुर।जसपुर तहसील इन दिनों कथित रिश्वतखोरी के एक वायरल वीडियो को लेकर सुर्खियों में है। तहसीलदार के नाम पर ₹20 हजार की मांग का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आते ही सियासी पारा चढ़ गया। कांग्रेस के तेजतर्रार विधायक आदेश सिंह चौहान खुद तहसील पहुंच गए और पूरे मामले पर जमकर हंगामा किया। उनके तेवरों से साफ था कि वे इसे केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि “व्यवस्था में जड़ जमा चुके भ्रष्टाचार” का प्रतीक मान रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक व्यक्ति कथित तौर पर तहसीलदार के नाम पर ₹20 हजार की मांग करता दिखाई दे रहा है। दावा किया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति किसी फाइल या कार्य को आगे बढ़ाने के एवज में रकम मांग रहा था। वीडियो सामने आने के बाद आम लोगों में भी चर्चा तेज हो गई कि क्या तहसील में बिना ‘राशि तय’ किए काम नहीं होता?

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हालांकि वीडियो की सत्यता और संदर्भ की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच के अधीन है, हिमालय प्रहरी इसकी पुष्टि नहीं करता है लेकिन इसके राजनीतिक और प्रशासनिक असर तत्काल दिखने लगे हैं।

विधायक का आक्रामक रुख

मंगलवार को विधायक आदेश सिंह चौहान अचानक तहसील पहुंच गए। उन्होंने तहसीलदार से वायरल वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की पहचान कर उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की। विधायक ने साफ कहा कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी के नाम पर भी रिश्वत मांगी जा रही है तो यह गंभीर अपराध है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तहसील में आम जनता की फाइलें बिना ‘चढ़ावे’ के आगे नहीं बढ़तीं। विधायक के इस बयान ने पूरे मामले को और गरमा दिया। तहसील परिसर में काफी देर तक तीखी बहस और हंगामे का माहौल बना रहा।

निजी मकान में सरकारी काम—नए सवाल

हंगामे के दौरान विधायक ने लेखपालों द्वारा निजी किराए के मकान में बैठकर सरकारी कार्य करने पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना था कि सरकारी काम निजी परिसर में होना पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।
बुधवार को जब मीडिया और स्थानीय लोग उस भवन पर पहुंचे, तो वहां ताला लटका मिला। इससे अटकलों का दौर और तेज हो गया। लोगों ने सवाल उठाया कि अगर सब कुछ नियमसम्मत था तो अचानक ताला क्यों?

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क्या कहते हैं तहसीलदार साहब?

तहसीलदार दलीप सिंह ने कहा कि वायरल वीडियो की गंभीरता से जांच की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तहसील प्रशासन का अपना भवन नहीं है, इसलिए लोगों की सुविधा के लिए लेखपाल अस्थायी रूप से निजी मकान के कक्ष में कार्य कर रहे थे।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में कोई दोषी पाया गया तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

चुनावी साल में सियासी तापमान

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब प्रदेश में चुनावी सरगर्मी बढ़ रही है। भाजपा सरकार लगातार “भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस” की नीति का दावा करती रही है। विपक्ष अब इसी मुद्दे को हथियार बनाकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
कांग्रेस का कहना है कि यदि तहसील स्तर पर भी खुलेआम अधिकारी के नाम पर रकम मांगी जा रही है तो यह शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल है। वहीं भाजपा के स्थानीय नेताओं का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले निष्कर्ष निकालना उचित नहीं।

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अब जनता की नजर कार्रवाई पर

जसपुर की जनता अब यह देख रही है कि जांच कितनी पारदर्शी और कितनी निष्पक्ष होती है। क्या वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की पहचान कर सख्त कार्रवाई होगी? क्या यह मामला बड़े खुलासे की ओर बढ़ेगा या फिर चुनावी शोर में दब जाएगा?
फिलहाल इतना तय है कि ₹20 हजार की यह कथित डिमांड जसपुर की सियासत में बड़ा मुद्दा बन चुकी है। विधायक के तेवरों ने प्रशासन को बैकफुट पर ला दिया है। अब अगली चाल प्रशासन की है—और नजर जनता की।

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