विकासनगर विवाद: मारपीट से ‘छेड़छाड़’ के आरोपों तक पहुँचा मामला
विकासनगर (देहरादून) में कश्मीरी युवकों के साथ हुई मारपीट का मामला अब एक बड़े सियासी और सामाजिक विवाद का रूप ले चुका है। जहाँ एक पक्ष इसे ‘छेड़छाड़’ का मामला बता रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे राज्य में जानबूझकर फैलाया जा रहा ‘सांप्रदायिक तनाव’ करार दे रहा है।
इस विवाद के ताज़ा घटनाक्रम और दोनों पक्षों के तर्कों का विवरण नीचे दिया गया है:
पृष्ठभूमि: बीते बुधवार को विकासनगर में शॉल और गर्म कपड़े बेचने आए कश्मीरी युवकों और एक स्थानीय दुकानदार के बीच विवाद हुआ था। मारपीट में कश्मीरी युवक घायल हुए, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी दुकानदार को गिरफ्तार कर लिया था।
1. हिंदूवादी संगठनों का पक्ष: ‘अभद्रता और छेड़छाड़’ का आरोप
हिंदूवादी नेता राकेश उत्तराखंडी की अगुवाई में आरोपी दुकानदार की पत्नी और स्थानीय दुकानदारों ने कोतवाली में तहरीर दी है। उनका तर्क है:
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अभद्रता का दावा: दुकानदार की पत्नी का आरोप है कि कश्मीरी युवकों ने उनके साथ अभद्रता और छेड़छाड़ की थी, जिसके विरोध में विवाद हुआ।
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कार्रवाई की मांग: संगठन का कहना है कि पुलिस केवल एक पक्षीय कार्रवाई कर रही है और कश्मीरी युवकों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
2. विपक्षी दलों का प्रहार: ‘सियासी ध्रुवीकरण’ का आरोप
जनाधिकार पार्टी (जनशक्ति) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आजाद अली ने इस मामले को लेकर प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है:
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सरकार पर दोष: आजाद अली का आरोप है कि प्रदेश में बढ़ रहे हिंदू-मुस्लिम विवादों के लिए सीधे तौर पर भाजपा सरकार की नीतियां और उनकी ‘चुप्पी’ जिम्मेदार है।
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ध्रुवीकरण की राजनीति: उन्होंने कहा कि आगामी चुनावों या सियासी फायदे के लिए राज्य के शांत माहौल को खराब करने की कोशिश की जा रही है।
📋 मामले की वर्तमान स्थिति
| पक्ष | मुख्य कार्रवाई / मांग |
| कश्मीरी युवक | मारपीट में घायल; पुलिस द्वारा आरोपी दुकानदार की गिरफ्तारी। |
| दुकानदार पक्ष | कश्मीरी युवकों पर छेड़छाड़ का आरोप लगाकर जवाबी तहरीर दी। |
| पुलिस प्रशासन | मामले की जांच जारी; दोनों पक्षों के दावों की सत्यता जांची जा रही है। |
| सियासी असर | हिंदूवादी संगठनों और जनाधिकार पार्टी के बीच जुबानी जंग तेज। |
👮 पुलिस की चुनौती
देहरादून पुलिस के लिए अब यह मामला कानून-व्यवस्था से ज्यादा संवेदनशील हो गया है। पुलिस सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और मौके पर मौजूद गवाहों के बयानों के आधार पर यह स्पष्ट करने की कोशिश कर रही है कि विवाद की शुरुआत छेड़छाड़ से हुई थी या सामान्य कहासुनी के बाद इसे सांप्रदायिक रंग दिया गया।

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