जड़ों में मट्ठा डालते रहे अपने… फिर भी 25 वर्षों से लगातार काशीपुर में खिल रहा हे कमल, आज तक कोई नहीं तोड़ पाया चीमा का तिलिस्म

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हरभजन से त्रिलोक तक बरकरार रहा विजय रथ, 2027 में क्या भाजपा का किला भेद पाएगी कांग्रेस?

 

राजू अनेजा, काशीपुर। उत्तराखंड की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शुमार काशीपुर में पिछले 25 वर्षों से राजनीतिक तस्वीर नहीं बदली है। चुनाव दर चुनाव चेहरे बदले, मुद्दे बदले, विपक्ष की रणनीतियां बदलीं, लेकिन नतीजा वही रहा—भाजपा के खाते में जीत और काशीपुर में खिलता कमल। इस पूरे दौर में पूर्व विधायक हरभजन सिंह चीमा से लेकर वर्तमान विधायक त्रिलोक सिंह चीमा तक चीमा परिवार का दबदबा कायम रहा। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर सवाल उठ रहा है कि आखिर इस सियासी किले को कौन भेद पाएगा?

 

25 वर्षों से चीमा परिवार का कायम है दबदबा

वर्ष 2002 से लेकर अब तक काशीपुर विधानसभा सीट पर भाजपा का परचम लहराता रहा है। हरभजन सिंह चीमा ने लगातार इस सीट पर भाजपा को मजबूत आधार दिया। उनके बाद पार्टी ने उनके पुत्र त्रिलोक सिंह चीमा पर भरोसा जताया और उन्होंने भी इस विरासत को कायम रखते हुए जीत दर्ज की। पिछले 25 वर्षों से यह सीट चीमा परिवार के राजनीतिक प्रभाव का गढ़ बनी हुई है।

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कांग्रेस ने  हर बार बदली रणनीति, लेकिन नहीं बदले नतीजे

हर चुनाव से पहले कांग्रेस ने नए समीकरण बनाए, नए चेहरे उतारे और सत्ता परिवर्तन के दावे किए। चुनाव प्रचार के दौरान माहौल भी बना, लेकिन मतगणना के बाद तस्वीर फिर वही नजर आई। लगातार चुनावी हार ने कांग्रेस के सामने कई सवाल खड़े किए हैं।

 

क्या कांग्रेस की राह में गुटबाजी बनी बड़ी चुनौती?

राजनीतिक हलकों में लंबे समय से यह चर्चा होती रही है कि कांग्रेस को भाजपा से जितनी चुनौती मिली, उतनी ही चुनौती संगठन के भीतर की खींचतान से भी मिलती रही। टिकट वितरण से लेकर चुनाव प्रचार तक मतभेदों की चर्चाएं कई बार सामने आईं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि संगठन पूरी तरह एकजुट होकर मैदान में उतरता, तो मुकाबला और कड़ा हो सकता था।

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आखीर आज तक क्यों नहीं टूटा चीमा का तिलिस्म?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बूथ स्तर तक मजबूत संगठन, कार्यकर्ताओं की सक्रियता, क्षेत्र में लगातार जनसंपर्क और चीमा परिवार की स्थानीय पहचान ने भाजपा की स्थिति को मजबूत बनाए रखा। यही कारण माना जाता है कि पिछले ढाई दशक में कोई भी प्रतिद्वंद्वी इस किले में सेंध नहीं लगा सका।

 

2027 में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी परीक्षा

2027 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए केवल एक और चुनाव नहीं, बल्कि 25 वर्षों से चले आ रहे राजनीतिक सूखे को खत्म करने की चुनौती भी होगा। यदि पार्टी संगठनात्मक एकजुटता दिखाती है और मजबूत चुनावी रणनीति के साथ मैदान में उतरती है तो मुकाबला रोचक हो सकता है। दूसरी ओर भाजपा अपने मजबूत संगठन और मौजूदा जनाधार के भरोसे इस सीट को बरकरार रखने की तैयारी में है।

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नजरें अब 2027 पर

अब पूरा राजनीतिक फोकस 2027 के चुनाव पर है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस इस बार चीमा परिवार के 25 वर्षों पुराने सियासी तिलिस्म को तोड़ पाएगी, या फिर काशीपुर में कमल लगातार खिलने का सिलसिला जारी रहेगा?

 

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