बिंदुखत्ता की जनता के साथ यह दोहरा चरित्र कैसा? बिंदुखत्ता राजस्व गांव कब सरकार जवाब दें- मोहन कुड़ाई

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लालकुआं : बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा देने की वर्षों पुरानी मांग को लेकर अब आवाज और बुलंद होती दिखाई दे रही है। हजारों परिवार अपने भूमि अधिकार और स्थायी राजस्व व्यवस्था की उम्मीद लगाए बैठे हैं। इसी मुद्दे को लेकर वरिष्ठ समाजसेवी वह कांग्रेसी नेता मोहन कुड़ाई ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बिंदुखत्ता की जनता के पक्ष में स्पष्ट और ठोस निर्णय की मांग की है।

मोहन कुड़ाई ने कहा कि जब लालकुआं स्थित सेंचुरी के पेपर कारोबार का अधिग्रहण ITC जैसी बड़ी कंपनी द्वारा किया जा सकता है और विभिन्न औद्योगिक एवं भूमि मामलों में कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से रास्ता निकाला जा सकता है, तो वर्षों से बसे बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा देने में इतनी देरी क्यों?

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उन्होंने कहा कि यह सवाल किसी उद्योग या कंपनी के विरोध का नहीं, बल्कि बिंदुखत्ता के हजारों परिवारों के अधिकार, सम्मान और भविष्य का सवाल है।

“बिंदुखत्ता की जनता को जवाब चाहिए”

मोहन कुड़ाई ने कहा कि बिंदुखत्ता के लोग लंबे समय से राजस्व गांव की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। समय-समय पर आश्वासन मिलते रहे, लेकिन स्थायी समाधान आज भी इंतजार में है।

उन्होंने सरकार से सीधा सवाल किया

“अगर बड़े औद्योगिक और भूमि संबंधी मामलों में नियमों के तहत रास्ता निकाला जा सकता है, तो बिंदुखत्ता के लिए वही इच्छाशक्ति क्यों नहीं दिखाई जा रही?”

उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने में वास्तविक अड़चन क्या है और इस प्रक्रिया को कब तक पूरा किया जाएगा।

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डबल इंजन सरकार से मोहन कुड़ाई की दो टूक मांग

मोहन कुड़ाई ने कहा कि अब बिंदुखत्ता की जनता केवल आश्वासन नहीं चाहती। सरकार को अपनी मंशा स्पष्ट करते हुए समयबद्ध तरीके से राजस्व गांव की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।

उन्होंने कहा—

“बिंदुखत्ता की जनता को अब वादा नहीं, अधिकार चाहिए। आश्वासन नहीं, राजस्व गांव चाहिए।”

“यह सवाल मोहन कुड़ाई का ही नहीं, बिंदुखत्ता की जनता की आवाज है”

मोहन कुड़ाई ने कहा कि बिंदुखत्ता के हजारों परिवारों के हित और भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर वह जनता के साथ मजबूती से खड़े हैं। उनका कहना है कि जब तक बिंदुखत्ता को उसका अधिकार नहीं मिलता, तब तक इस मुद्दे को मजबूती से उठाया जाता रहेगा।

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“सेंचुरी के मामले में रास्ता निकल सकता है, तो बिंदुखत्ता के लिए क्यों नहीं?”

अब सरकार से जनता के साथ-साथ मोहन कुड़ाई भी स्पष्ट जवाब मांग रहे हैं—
बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा आखिर कब मिलेगा?

मोहन कुड़ाई का संदेश

“बिंदुखत्ता मेरा मुद्दा नहीं, बिंदुखत्ता की जनता का अधिकार है।
मैं जनता के साथ हूं और जनता की आवाज को मजबूती से उठाता रहूंगा।”

— मोहन कुड़ाई
बिंदुखत्ता की जनता के हक और अधिकार की आवाज

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