कांग्रेस को हजम कर भाजपा को रौंदने के लिए तैयार दीपक बाली,क्या रंग लाएगी दीपक’ की दो साल की ‘मेहनत’

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राजू अनेजा, काशीपुर। पिछले 2 साल से काशीपुर में अपनी अलग पहचान बना चुके दीपक बाली चुनावी रण में भाजपा के ठीक सामने आ गए हैं राजनीतिक हलकों की बात की जाए तो दीपक वाली ने कांग्रेस के वोट बैंक में काफी सेंधमारी कर भाजपा को घेरने के लिए अपना चक्रव्यूह रच दिया है यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो कांग्रेस को हजम कर दीपक बाली 14 फरवरी को होने वाले मुख्य मुकाबले में भाजपा प्रत्याशी को करारी शिकस्त देने जा रहे हैं।

बताते चलें कि भाजपा प्रत्याशी त्रिलोक सिंह चीमा अपने पिता की 20 सालों की एंटी इंकम्बेसी के सवालात झेल रहे हैं तो कांग्रेस प्रत्याशी नरेंद्र चंद सिंह के सामने अभी अपनी खुद की पहचान बनाने की चुनौती है। दूसरी ओर आप प्रत्याशी दीपक बाली अपनी पिछले दो साल की मेहनत की दम पर जनसमर्थन हासिल करते दिख रहे हैं। इन हालात में चुनावी मुकाबला बाली और चीमा के बीच माना जा रहा है और काशीपुर में प्रत्येक नागरिक की जुबान पर विराजमान बाली भाजपा उम्मीदवार से भारी भरकम साबित हो रहे हैं। आप प्रत्याशी के दीपक बाली के सामने न तो पहचान का संकट है और न ही किसी तरह की कोई एंटी इंकम्बेसी है। क्षेत्र में जिस तरह से काशीपुर के लोगों के दिल में जगह बना चुके दीपक पिछले दो सालों से क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। अपने समाजसेवा के कामों और भ्रष्टाचार के खुलासों को लेकर दीपक खासी चर्चा में रहे हैं। अहम बात यह भी है कि एक तरफ जहां कांग्रेस और भाजपा के नेता टिकट का इंतजार कर रहे थे तो बाली काशीपुर के हर बूथ तक अपनी टीम तैयार चुके थे। उन्हें मिल रहा जनसमर्थन इस बात का संकेत दे रहा है कि उन्हें दो साल की मेहनत का सिला देने को जनता तैयार है। यदि जनता की बात की जाए तो क्षेत्र में दीपक बाली को किसी पार्टी की बदौलत नहीं बल्कि दीपक वाली को उनकी काबिलियत पर जनता ज्यादा पसंद कर रही है फिलहाल काशीपुर की जनता की पहली पसंद बन चुके दीपक बाली चुनावी रण को जितने के लिए अपनी हुंकार भर चुके हैं।

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बिजली, सड़क, सफाई, अस्पताल और जलभराव की समस्या पर भाजपा की 20 साल की परफॉर्मर्स जीरो

काशीपुर सीट से भाजपा ने त्रिलोक को टिकट दिया है। पिछले बीस सालों से उनके पिता हरभजन सिंह चीमा इसी सीट से विधायक हैं। सोशल मीडिया के इस दौर में त्रिलोक को जनता के सवालों से जूझना पड़ रहा है। लोग सोशल मीडिया में बिजली, सड़क, सफाई, अस्पताल और जलभराव पर सवाल पूछ रहे हैं कि 20 सालों में उनके पिता के क्या किया। भाजपा के सामने अपने कई अहम नेताओं की चुनावी खामोशी का सवाल भी मुंह बाए खड़ा है।

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कांग्रेस प्रत्याशी नरेंद्र चंद सिंह के सामने पहचान का संकट

कांग्रेस प्रत्याशी नरेंद्र चंद सिंह के सामने पहचान का संकट है। उनके पिता केसी सिंह बाबा सांसद औऱ विधायक रहे हैं। लेकिन जनता ने इस चुनाव से पहले नरेंद्र चंद को शायद ही कभी देखा हो। ऐसे में उनके प्रचार में लगे कांग्रेसियों को मतदाताओं को यह बताना पड़ा रहा है कि यही नरेंद्र चंद सिंह हैं। पहचान के संकट से जूझ रहे नरेंद्र ने अब अपने नाम के आगे अपने पिता की पहचान वाला ‘बाबा’ नाम भी जोड़ लिया है।

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