भालू के हमले में गंभीर रूप से घायल महिला की रामनगर अस्पताल में मौत; तीन घंटे के सफर ने छिना इलाज का वक्त

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रामनगर/धुमाकोट। पर्वतीय क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष का खौफनाक चेहरा एक बार फिर सामने आया है। पौड़ी गढ़वाल के नैनीडांडा ब्लॉक में जंगल गई 52 वर्षीय महिला पर भालू ने जानलेवा हमला कर दिया। भालू के हमले में बुरी तरह जख्मी महिला को रामनगर संयुक्त चिकित्सालय लाया गया, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया है, वहीं दूरस्थ पहाड़ी इलाकों में बदहाल स्वास्थ्य व आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जंगल में बकरियां चराने के दौरान भालू ने चेहरे पर किया हमला; चीख-पुकार सुन भागा हिंसक जानवर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, धुमाकोट (नैनीडांडा) निवासी मंजू देवी (52 वर्ष) पत्नी होशियार सिंह बुधवार दोपहर रोजमर्रा की भांति गांव के समीप खालूढांढा के जंगल में बकरियों को चराने और मवेशियों के लिए घास काटने गई थीं। इसी दौरान झाड़ियों में छिपे भालू ने अचानक उन पर हमला बोल दिया। भालू ने महिला के चेहरे को बुरी तरह नोच डाला, जिससे उनका मुंह पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। महिला की चीख-पुकार सुनकर आसपास मौजूद ग्रामीणों ने शोर मचाया और हांका लगाया, जिसके बाद भालू महिला को लहुलूहान छोड़कर जंगल की तरफ भाग निकला।
तीन घंटे के लंबे सफर के बाद रामनगर पहुंची घायल महिला, अस्पताल में तोड़ा दम
ग्रामीणों और परिजनों ने आनन-फानन में गंभीर रूप से घायल मंजू देवी को वाहन के जरिए रामनगर संयुक्त चिकित्सालय पहुंचाया। पहाड़ी मार्ग और दुर्गम क्षेत्र होने के कारण घटनास्थल से रामनगर अस्पताल पहुंचने में ही करीब 3 से 4 घंटे का बहुमूल्य समय बर्बाद हो गया। अस्पताल के चिकित्साधिकारी डॉ. सारिक ने बताया कि महिला के चेहरे पर बेहद गंभीर चोटें आई थीं। प्राथमिक उपचार देकर उन्हें हायर सेंटर रेफर करने की तैयारी की जा रही थी, लेकिन अत्यधिक खून बह जाने और स्थिति नाजुक होने के कारण उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
पहाड़ की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल
मृतका के पति होशियार सिंह ने रोते हुए बताया कि यदि उनके क्षेत्र के पास कोई बेहतर आपातकालीन चिकित्सा सुविधा या त्वरित रेफरल परिवहन व्यवस्था होती, तो समय पर इलाज मिलने से उनकी पत्नी की जान बचाई जा सकती थी। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के दुरुस्त होने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन वन्यजीवों के हमलों या अन्य गंभीर हादसों में घायलों को 3-4 घंटे दूर रामनगर या कोटद्वार ही भागना पड़ता है। ग्रामीणों ने मृतका के परिवार को वन विभाग से उचित मुआवजा देने और क्षेत्र में सक्रिय हिंसक भालू को पकड़ने की पुरजोर मांग की है।
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