कैलाश विजयवर्गीय के उत्तराखंड पहुंचने की काट में भूपेश बघेल भी पहुंच रहे देहरादून

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी आज दोपहर तक देहरादून पहुंच सकते हैं। इसे कैलाश विजयवर्गीय की काट के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस अपने प्रत्याशियों के लिए सुरक्षा का घेरा तैयार करने में भी जुटी है। वह अपने उम्मीदवारों को राजस्थान या छत्तीसगढ़ भी शिफ्ट कर सकती है।

10 मार्च को उत्तराखंड समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे आने वाले हैं। इससे पहले उत्तराखंड में बड़ी सियासी हलचल दिखाई दे रही है। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही अपनी-अपनी रणनीति पर काम करने में जुट गए हैं। लेकिन इस बीच बीजेपी के रणनीतिकार और राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय देहरादून पहुंच गए हैं। जिसकी खबर से कांग्रेस के माथे पर चिंता की लकीरें देखने को मिल रही हैं। पार्टी के अंदरखाने हलचल मच गई है। विजयवर्गीय के आने से कांग्रेस में बैठकों का दौर शुरू हो गया है।

विजयवर्गीय मंथन में जुटे
कैलाश विजयवर्गीय मंगलवार को देहरादून पहुंचे। कई नेताओं से मुलाकात की और नतीजों को लेकर मंथन भी। इस बीच मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दो निर्दलीय प्रत्याशियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ.रमेश पोखरियाल से मुलाकात की है। इनमें एक यमुनोत्री सीट से निर्दलीय प्रत्याशी संजय डोभाल भी हैं। इस मुलाकात के बाद सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। भले ही बीजेपी की तरफ से पूर्ण बहुमत के दावे हो रहे हैं लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों की माने तो पार्टी हर उस विकल्प पर काम कर रही है, जिसकी नजीतों के बाद जरुरत पड़ सकती है।

कांग्रेस को किस बात का डर

निर्दलीय प्रत्याशियों से मेल-मुलाकात और विजयवर्गीय का देहरादून पहुंचना कांग्रेस को डरा रहा है। कांग्रेस को जोड़-तोड़ की चिंता सताने लगी है। यही कारण है कि बीजेपी के रणनीतकार कैलाश विजयवर्गीय के वहां पहुंचने से कांग्रेस के खेमे में हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी विजयवर्गीय की सक्रियता को लेकर ऐसी आशंका जाहिर कर चुके हैं। इसलिए कांग्रेस ने भी अपने रणनीतिकारों को एक्टिव कर दिया है। कई बड़े नेता उत्तराखंड पहुंच चुके हैं और कई आज शाम तक पहुंच जाएंगे।

पार्टी की तरफ से छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भी कमान संभाले हुए हैं। भूपेश बघेल भी आज दोपहर तक देहरादून पहुंच सकते हैं। इसे कैलाश विजयवर्गीय की काट के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस अपने प्रत्याशियों के लिए सुरक्षा का घेरा तैयार करने में भी जुटी है। वह अपने उम्मीदवारों को राजस्थान या छत्तीसगढ़ भी शिफ्ट कर सकती है। बता दें कि साल 2016 में कांग्रेस में सेंधमारी हो चुकी है, जिसके कारण वह कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।

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