गदरपुर तहसील में ऐसे चल रहा था फर्जीवाड़े का खेल! सील से लेकर हस्ताक्षर तक सब नकली,पुलिस ने दो को दबोचा

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दस से अधिक फर्जी प्रमाण पत्र मिलने की आशंका, तहसील की सील और कथित फर्जी हस्ताक्षर भी जांच के घेरे में

राजू अनेजा, गदरपुर। गदरपुर तहसील में फर्जी जाति और निवास प्रमाण पत्र तैयार कराने के मामले ने तहसील प्रशासन में खलबली मचा दी है। तहसील प्रशासन की सतर्कता के चलते फर्जी दस्तावेजों के सहारे प्रमाण पत्र बनवाने का प्रयास कर रहे दो युवकों को पकड़कर पुलिस के सुपुर्द किया गया है। मामले में अब पुलिस और तहसील प्रशासन दस्तावेजों की गहन जांच में जुट गया है।

बताया जा रहा है कि गदरपुर क्षेत्र के दोनों युवक लंबे समय से कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जाति और निवास प्रमाण पत्र बनवाने का प्रयास कर रहे थे। दस्तावेजों में कुछ गड़बड़ी नजर आने पर तहसीलदार लीना चंद्रा धामी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अभिलेखों की गहन जांच शुरू कराई।

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जांच में सामने आईं कई गंभीर गड़बड़ियां

प्रारंभिक जांच के दौरान कई प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए। दस्तावेजों की पड़ताल आगे बढ़ी तो कुछ प्रमाण पत्रों पर तहसील की सील और कथित फर्जी हस्ताक्षर होने की बात भी सामने आई। इसके बाद दोनों युवकों को तहसील परिसर में बुलाकर पूछताछ की गई।

करीब छह घंटे तक चली पूछताछ के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने दोनों युवकों से दस्तावेजों के संबंध में विस्तृत जानकारी ली। पूछताछ में मिले तथ्यों और सामने आए सुरागों के बाद मामले को और गंभीरता से लिया गया।

 

एसडीएम के निर्देश पर पुलिस के हवाले

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम अमृता शर्मा के निर्देश पर दोनों युवकों को पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। अब पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कथित फर्जी प्रमाण पत्र किसके माध्यम से तैयार किए गए और इस पूरे प्रकरण में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

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दस से अधिक प्रमाण पत्रों की भी जांच

सूत्रों के अनुसार, दोनों युवकों के कब्जे या संपर्क से दस से अधिक कथित फर्जी प्रमाण पत्र सामने आने की आशंका है। इनमें जाति और निवास प्रमाण पत्र शामिल बताए जा रहे हैं। प्रशासन द्वारा इन सभी दस्तावेजों की सत्यता की जांच कराई जा रही है।

मामले में यदि तहसील की आधिकारिक मुहर और अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल किए जाने की पुष्टि होती है तो प्रकरण और गंभीर हो सकता है। फिलहाल तहसील प्रशासन की कार्रवाई के बाद प्रमाण पत्रों के पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल लोगों की भूमिका जांच के केंद्र में आ गई है।

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प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद तहसील परिसर में हड़कंप की स्थिति है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कराने के इस कथित खेल का दायरा कितना बड़ा है और इसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे।

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