नैनीताल में सितंबर मध्य तक इतिहास की सबसे कम बारिश, 1108 एमएम बारिश हुई रिकॉर्ड

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नैनीताल. उत्तराखंड का नैनीताल अपने मौसम और नैनी झील की वजह से काफी मशहूर है. हालांकि नैनी झील और यहां के कई इलाकों में अब समस्या आने लगी है.

दरअसल इस बार कम बारिश होने से संकट बढ़ गया है. मुख्य तौर पर मॉनसून सीजन में होने वाली बारिश की वजह से नैनी झील पानी से लबालब भर जाया करती थी, लेकिन इस साल नैनीताल में सितंबर मध्य तक इतिहास की सबसे कम बारिश देखने को मिली है.

नैनी झील का स्तर सबसे ज्यादा 12 फीट तक पहुंचता है. इससे ज्यादा होने पर ब्रिटिशकालीन निकासी गेटों को खोलकर पानी बाहर निकाल दिया जाता है. हर साल की बारिश में भले ही झील का स्तर 12 फीट तक न भी पहुंचता हो, लेकिन इसके आसपास बना रहता था.

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सिंचाई विभाग की तरफ से साल 1990 से लेकर अभी तक हर साल हुई बारिश और झील के जलस्तर का रिकॉर्ड कंप्यूटर में स्टोर किया हुआ है. सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता डीडी सती के मुताबिक, पिछले साल 2021 में सितंबर मध्य तक 1772 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई थी. इस वर्ष अभी तक 1108 एमएम बारिश ही रिकॉर्ड की गई है, जो अब तक सबसे कम है.

सिंचाई विभाग से लिए गए आंकड़ों की बात करें, तो 14 सितंबर तक नैनीताल में 2010 में 3359 एमएम, 2011 में 4310 एमएम, 2013 में 4074 एमएम, 2014 में 4705 एमएम, 2015 में 4621 एमएम बारिश हुई है. वहीं, साल 2019 में 1325 एमएम, साल 2020 में 1567 एमएम बारिश हुई है. हालांकि इस साल यह केवल 1100 के करीब हुई है, जो अब तक सबसे कम है. कई साल सितंबर के महीने में इससे 3 से 4 गुना ज्यादा बारिश भी हुई है.

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क्लाइमेट चेंज बना परेशानी

मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के प्रभारी विक्रम सिंह ने न्यूज 18 लोकल से बात करते हुए बताया कि इस वर्ष अब तक उत्तराखंड के कुछ जिलों में अन्य साल की अपेक्षा कम बारिश हुई है. क्लाइमेट चेंज की वजह से यह मौसमी उतार-चढ़ाव हुए हैं, जिससे कुछ जगहों पर कम बारिश हुई है.

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बारिश कम होने की वजह से इस साल नैनी झील के स्तर में भी गिरावट देखी गई है. झील का स्तर अपने सामान्य स्तर से लगभग 4 फीट कम है. झील का कम स्तर भविष्य के लिए चिंताजनक है, जिससे पेयजल की कमी या फिर झील के स्तर में और भी ज्यादा गिरावट जैसी दिक्कतें सामने आ सकती हैं.

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