फेसबुक पर दोस्ती और फिर प्यार में देश के साथ बेवफाई, भारतीय वायु सेना के सार्जेंट गिरफ्तार

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फेसबुक पर दोस्ती होती है और फिर प्यार में देश के साथ बेवफाई का खेल चलता है। जी हां मामला है देश की खुफिया जानकारी को बेचने का। इसी मामले में गिरफ्तारी हुई है। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ के लिए जासूसी करने के आरोप में भारतीय वायु सेना के सार्जेंट (हवलदार) देवेंद्र कुमार शर्मा को गिरफ्तार किया है।

किस प्रकार की जानकारी कराता था आइएसआइ को मुहैया

आरोपित, आइएसआइ को रक्षा प्रतिष्ठानों के अलावा वायु सेना के उच्च अधिकारियों के नाम, पता व उनकी तैनाती आदि के बारे में संवेदनशील जानकारी मुहैया करा रहा था। वाटसएप, टेलीग्राम व अन्य इलेक्ट्रानिक माध्यम से वह गोपनीय व संवेदनशील जानकारी लीक कर रहा था। सार्जेंट की पत्नी के बैंक खाते में पुलिस काे कई संदिग्ध लेनदेन की जानकारी मिली है, जिसके बारे में पता लगाया जा रहा है।

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सेना के रिकार्ड रूम में बतौर एडमिन असिस्टेंट के तौर पर थी तैनाती

क्राइम ब्रांच के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक गिरफ्तार किए गए सार्जेंट देवेंद्र कुमार शर्मा मूलरूप से उत्तर प्रदेश के कानपुर का रहने वाला है। नई दिल्ली के सुब्रतो पार्क स्थित वायु सेना के रिकार्ड कार्यालय में वह बतौर एडमिन असिस्टेंट के रूप में तैनात था। कुछ माह पहले आइएसआइ की एजेंट एक महिला ने फेसबुक के जरिए देवेंद्र से दोस्ती की थी। महिला ने उससे फोन पर गंदे काम के जरिए ट्रैप कर लिया था। उसके बाद पैसों का लालच देकर उससे संवेदनशील जानकारी प्राप्त करने लगी थी। जिस नंबर से महिला, देवेंद्र से बात करती थी वह भारतीय सर्विस प्रोवाइडर का नंबर है। क्राइम ब्रांच उस महिला के बारे में पता लगाने की कोशिश कर रही है।

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गोपनीय सूचना के आधार पर हुई गिरफ्तारी

गत छह मई को एसीपी अरविंद कुमार व इंस्पेक्टर राकेश कुमार की टीम नेे गोपनीय सूचना के आधार पर देवेंद्र को धौलाकुआं के पास से दबोच लिया। कुछ समय पहले वायु सेना के अधिकारी से पुलिस आयुक्त को रक्षा से संबंधित संवेदनशील जानकारी आइएसआइ को मुहैया कराने के बारे में शिकायत मिली थी। आयुक्त ने मामले की जांच के लिए क्राइम ब्रांच को लगा दिया था।

जानकारी के बदले मिलते थे पैसे

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जांच में पता चला कि आरोपित सार्जेंट कंप्यूटर व अन्य फाइलों से संवेदनशील जानकारी प्राप्त कर उसे आइएसआइ के एजेंट को भेज देता था। इसके बदले में आइएसआइ से उसे पैसे मिलते थे। शिकायत की पुष्टि होने के बाद क्राइम ब्रांच ने आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया था। क्राइम ब्रांच को उसके पास से मोबाइल, कंप्यूटर व कुछ दस्तावेज मिले हैं जिसकी जांच कर पूरे साजिश का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।