सरकार के विरोध में हरदा की यात्रा, लेकिन संगठन की दूरी ने उठाए सवाल ! अब 2027 से पहले कांग्रेस के सामने संगठन को साथ रखने की चुनौती

खबर शेयर करें -

राजू अनेजा, काशीपुर।पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की जनसंवाद यात्रा काशीपुर पहुंची तो निशाने पर रही धामी सरकार, लेकिन यात्रा के दौरान कांग्रेस संगठन की मौजूदगी ने ही कई सवाल खड़े कर दिए। हरदा ने कार्यकर्ताओं से 2027 के लिए कमर कसने और जनता के बीच सक्रिय होने का आह्वान किया, मगर दूसरी ओर महानगर अध्यक्ष अलका पाल समेत कई प्रमुख स्थानीय पदाधिकारी कार्यक्रम में नजर नहीं आए।

यही तस्वीर अब काशीपुर की कांग्रेस की सियासत में चर्चा का विषय बन गई है। एक तरफ हरदा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की बात कर रहे हैं, दूसरी तरफ अपने ही संगठन के कई प्रमुख चेहरे कार्यक्रम से दूर दिखाई दिए।

 

हरदा बोले—जनता बदलाव चाहती है

नवीन अनाज मंडी परिसर स्थित विश्राम गृह में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए हरीश रावत ने कहा कि जनता बदलाव चाहती है और कांग्रेस को इस बदलाव की गति तेज करनी होगी।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से जनता के बीच जाने और संगठन को सक्रिय करने का आह्वान करते हुए कहा कि 2027 में देहरादून और 2029 में दिल्ली में बदलाव के लिए अभी से मेहनत करनी होगी।

हरदा का संदेश साफ था—सड़क से लेकर जनता के बीच तक कांग्रेस को सक्रिय दिखाई देना होगा।

यह भी पढ़ें 👉  अचानक बिगड़ी तबीयत: बिंदुखत्ता में दुग्ध समिति सचिव महेंद्र सिंह कन्याल का आकस्मिक निधन, क्षेत्र में शोक की लहर

धामी सरकार पर तंज, यात्रा को लेकर सरकार को घेरा

 

रावत ने अपनी यात्रा के दौरान धामी सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी यात्रा को लेकर सरकार घबरा रही है।

उन्होंने काशीपुर के आरओबी के पांच दिन बंद रहने और यात्रा मार्ग में निर्माण कार्य शुरू होने का जिक्र करते हुए इसे लेकर सरकार पर तंज कसा। हालांकि इन व्यवस्थाओं के पीछे प्रशासनिक या निर्माण संबंधी कारणों को लेकर अलग तथ्य हो सकते हैं, लेकिन रावत ने इन्हें अपनी यात्रा के संदर्भ में राजनीतिक मुद्दा बनाया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता ऐसी चीजों से डरने वाले नहीं हैं और अगली बार वह बिना सूचना दिए भी यहां पहुंच सकते हैं।

लेकिन असली चर्चा मंच से ज्यादा संगठन की गैरमौजूदगी की

 

हरदा की सभा में सरकार के खिलाफ तेवर जरूर दिखे, लेकिन कार्यक्रम के दौरान स्थानीय कांग्रेस संगठन की पूरी मौजूदगी नहीं दिखना अपने आप में चर्चा का विषय बन गया।

महानगर अध्यक्ष अलका पाल समेत कई प्रमुख पदाधिकारी कार्यक्रम में नजर नहीं आए। उनकी गैरमौजूदगी का कोई स्पष्ट सार्वजनिक कारण सामने नहीं आया है, इसलिए इसे सीधे विरोध या गुटबाजी का प्रमाण कहना जल्दबाजी होगी।

लेकिन सवाल उठना स्वाभाविक है—जब पार्टी के वरिष्ठ नेता 2027 की तैयारी और एकजुट होकर जनता के बीच जाने का संदेश दे रहे हैं, तब स्थानीय संगठन के कई प्रमुख चेहरे कार्यक्रम में क्यों नहीं दिखे?

यह भी पढ़ें 👉  वीकेंड पर रफ्तार का कहर: बेरीपड़ाव हादसे के बाद वीआईपी गेट रेलवे पुल के पास दर्दनाक हादसा, 4 दिन में 4 मौतों से दहशत

हरदा की हुंकार और संगठन की खामोशी—सवाल यहीं से शुरू

 

राजनीति में किसी बड़े नेता का कार्यक्रम केवल भाषण से नहीं, बल्कि संगठन की सक्रिय भागीदारी से भी देखा जाता है। ऐसे में हरदा की यात्रा के दौरान संगठन के कुछ प्रमुख चेहरों की गैरमौजूदगी ने चर्चा को जन्म दिया है।

क्या यह महज व्यस्तता या व्यक्तिगत कारणों से हुई अनुपस्थिति थी?

क्या कार्यक्रम को लेकर पर्याप्त समन्वय नहीं बन पाया?

या फिर स्थानीय संगठन और वरिष्ठ नेतृत्व के बीच संवाद को और मजबूत करने की जरूरत है?

इन सवालों के जवाब कांग्रेस के स्थानीय पदाधिकारियों के सामने आने के बाद ही तस्वीर साफ होगी।

शैलजा की आपत्ति के बीच यात्रा ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

 

हरीश रावत की जनसंवाद यात्रा को लेकर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा की आपत्ति की चर्चा पहले से रही है। इसके बावजूद रावत अपनी यात्रा लेकर मैदान में उतरे और काशीपुर में कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद किया।

ऐसे में स्थानीय संगठन के कुछ प्रमुख पदाधिकारियों की गैरमौजूदगी ने इस यात्रा की राजनीतिक चर्चा को और बढ़ा दिया।

हरदा का फोकस सरकार पर रहा, लेकिन कैमरों और राजनीतिक चर्चाओं का एक हिस्सा कांग्रेस के अपने संगठन पर टिक गया।

यह भी पढ़ें 👉  छात्रों पर पढ़ाई के बढ़ते मानसिक दबाव की दुखद परिणति: बड़ी बहन की डांट से क्षुब्ध 11वीं की छात्रा ने फ्लाईओवर से कूदकर की आत्महत्या

2027 से पहले सबसे बड़ी चुनौती—संगठन को साथ रखना

 

कांग्रेस के लिए 2027 का विधानसभा चुनाव अभी दूर जरूर है, लेकिन राजनीतिक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। ऐसे में वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता के साथ स्थानीय संगठन का समन्वय भी महत्वपूर्ण होगा।

हरदा लगातार कार्यकर्ताओं को सक्रिय होने और जनता के बीच जाने का संदेश दे रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनकी यात्राओं और कार्यक्रमों में स्थानीय संगठन किस स्तर पर साथ दिखाई देता है।

सरकार के खिलाफ हरदा की हुंकार तो सुनाई दी, लेकिन काशीपुर में संगठन की गैरमौजूदगी ने एक अलग ही सवाल छोड़ दिया—2027 की लड़ाई से पहले क्या कांग्रेस अपने पूरे संगठन को एक मंच पर ला पाएगी?

कार्यक्रम में गोविंद कुंजवाल, प्रदीप टम्टा, ललित फर्शेवान, मनोज जोशी, मनोज तिवारी, आदेश चौहान, संदीप सहगल, हरीश कुमार सिंह, अर्पित मेहरोत्रा समेत अन्य कार्यकर्ता व नेता मौजूद रहे।

Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad