‘हरी चादर’ की बात करने वालों को जनता ने वोटों का ऐसा कंबल ओढ़ाया कि आसमान भी रो पड़ा!

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किच्छा में धार्मिक बयानबाजी पर भारी पड़ा जनादेश, राजेश प्रताप सिंह की जीत ने बदल दिया चुनावी समीकरण

राजू अनेजा, किच्छा।किच्छा नगर पालिका चुनाव का नतीजा सामने आते ही चुनाव प्रचार के दौरान गूंजे ‘हरी चादर’ वाले कथित बयान की चर्चा फिर तेज हो गई है। भाजपा प्रत्याशी संदीप अरोड़ा के समर्थन में प्रचार के दौरान रुद्रपुर मेयर विशाल शर्मा का एक कथित बयान सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रहा था। अब जब मतपेटियां खुलीं और कांग्रेस प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह ने जीत दर्ज की तो सियासी गलियारों में इस बयान के चुनावी असर को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

चादर की बात चली थी, जनता ने वोटों का कंबल डाल दिया!

प्रचार के दौरान वायरल हुए कथित बयान में भाजपा प्रत्याशी को जिताने पर ‘त्रिशूल चौक और डमरू चौक’ बनाने तथा अन्यथा ‘हर जगह हरी चादरें दिखाई देने’ की बात कही गई थी। बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं हुईं।

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अब परिणाम सामने आने के बाद कांग्रेस समर्थक इसे अलग अंदाज में देख रहे हैं। उनका कहना है कि धार्मिक प्रतीकों और बयानबाजी से मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश के बजाय जनता ने अपने वोट से जवाब दिया।

हालांकि, चुनाव परिणाम को किसी एक बयान का सीधा परिणाम मानना बिना विस्तृत मतदान आंकड़ों के उचित नहीं होगा। लेकिन इतना जरूर है कि यह बयान चुनावी चर्चा का हिस्सा बना रहा।

धर्म की बहस के बीच मतपेटी ने सुनाया फैसला

किच्छा का चुनाव इस बार सामान्य निकाय चुनाव से कहीं ज्यादा राजनीतिक हो गया था। एक तरफ प्रत्याशियों के बीच मुकाबला था तो दूसरी तरफ विधायक तिलकराज बेहड़ और पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के प्रभाव की चर्चा भी लगातार होती रही।

मतदान के दौरान हुए विवाद और उसके बाद की घटनाओं ने चुनाव को और हाईप्रोफाइल बना दिया। विधायक तिलकराज बेहड़ को थप्पड़ मारे जाने की घटना के बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला और मामला मतगणना तक पहुंचते-पहुंचते न्यायालय की चौखट तक जा पहुंचा।

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थप्पड़ की गूंज, ‘हरी चादर’ की चर्चा और फिर वोटों का फैसला

किच्छा के चुनाव में तीन घटनाक्रम लगातार चर्चा में रहे—मतदान के दौरान हुआ विवाद, ‘हरी चादर’ वाला कथित बयान और मतगणना को लेकर न्यायिक लड़ाई।

लेकिन इन तमाम राजनीतिक चर्चाओं के बीच अंतिम फैसला मतदाता ने किया। मतपेटी खुली तो कांग्रेस प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह के पक्ष में जनादेश सामने आया।

आसमान भी बरसा, किच्छा का फैसला भी बरसा

सात अक्टूबर को मतगणना के दिन मौसम ने भी जैसे इस चुनावी कहानी में अपना रंग भर दिया। आसमान से बारिश हुई और दूसरी तरफ मतगणना में राजेश प्रताप सिंह की जीत का ऐलान हुआ।

इसी को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में व्यंग्य गूंजने लगा—
“हरी चादर की बात करने वालों को जनता ने वोटों का ऐसा कंबल ओढ़ाया कि आसमान भी रो पड़ा!”

हालांकि यह राजनीतिक व्यंग्य है, लेकिन चुनाव का वास्तविक संदेश इससे कहीं अधिक सीधा है—किच्छा की नगर पालिका के लिए मतदाताओं ने अपना प्रतिनिधि चुन लिया है।

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अब नजर 2027 पर

किच्छा का यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि विधानसभा चुनाव से पहले इसे स्थानीय राजनीतिक ताकतों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा था। राजेश प्रताप सिंह की जीत से कांग्रेस खेमे को राजनीतिक ऊर्जा मिली है, जबकि भाजपा के सामने इस परिणाम का बूथवार और क्षेत्रवार विश्लेषण करने की चुनौती होगी।

चुनाव खत्म हो गया, मतपेटियां खुल गईं और फैसला भी सामने आ गया। अब ‘हरी चादर’ की बहस से आगे असली सवाल यह है—किच्छा का यह जनादेश 2027 की बड़ी सियासी तस्वीर में कितना असर डालता है?