‘3 साल पहले हुआ था प्रमोशन, ढाई साल की बेटी…’ , कलेजा चीर देगी शहीद कर्नल मनप्रीत की ये स्टोरी

‘अभी तीन साल पहले तो प्रमोशन हुआ था और 6 साल का बेटा है उनका….’इतना कहते ही फफक-फफक रो पड़े कर्नल मनप्रीत सिंह के ससुर जगदेव सिंह, जिनकी गोद में में मासूम वाणी यानी कि शहीद कर्नल की ढाई साल बेटी थी।
उन्होंने कहा कि ‘हमें कल देर शाम में मनप्रीत सिंह के शहीद होने की सूचना मिली, हमें भरोसा ही नहीं हो रहा कि वो अब हमारे बीच में नहीं रहे।’ जिस पिता ने साल 2016 में अपनी बेटी का कन्यादान देश के वीर मनप्रीत सिंह के साथ किया हो, आज उसे विधवा होते देख उसके सीने पर क्या गुजर रही होगी, इस बात का अंदाजा लगाना भी बहुत मुश्किल है।
आज शाम कर्नल का पार्थिव शरीर मोहाली पहुंचेगा
जगदेव सिंह ने कहा कि ‘आज शाम कर्नल का पार्थिव शरीर मोहाली पहुंचेगा’। आपको बता दें कि सेना मेडल से सम्मानित कर्नल मनप्रीत सिंह पंचकूला के रहने वाले थे लेकिन उनकी परिवार फिलहाल मोहाली में रहता है।
मनप्रीत सिंह को तीन साल पहले ही प्रमोशन मिला था
जिंदगी को जिंदादिली से जीने वाले मनप्रीत सिंह को तीन साल पहले ही प्रमोशन मिला था। वो पिछले चार साल से अनंतनाग में पोस्टेड थे। बहादुरी का दूसरा नाम मनप्रीत के खून में देशभक्ति थी, उनके पिता भी सेना में थे। अपने देश के नाम अपनी जिंदगी न्यौछावर करने वाले ने साल 2003 में सीडीएस की परीक्षा पास की थी और वो साल 2005 में लेफ्टिनेंट बने थे।
साल 2016 में जगमीत ग्रेवाल से हुई थी शादी
स्वभाव से बेहद हंसमुख मनप्रीत की शादी साल 2016 में जगमीत ग्रेवाल से हुई थी। वो सरकारी स्कूल में टीचर हैं, उनका स्कूल उनके पापा के घर के पास है इसलिए वो पंचकूला में अपने पिता के साथ रहती हैं। इस शादी से कर्नल मनप्रीत को दो बच्चे हैं। पहला बेटा कबीर सिंह है, जिसकी उम्र 6 साल है और दूसरी ढाई साल की बेटी वाणी है।
मनप्रीत के खून में देशभक्ति
केवल उनके पिता ही नहीं बल्कि उनके चाचा और दादा भी सेना में थे। मार्च 2021 में कर्नल मनप्रीत सिंह को उनके अदम्य साहस के लिए गैलेंट्री सेना मेडल से नवाजा गया था।
‘आज वो किस्मत वाला बन गया…’
उनके शहीद होने की खबर से पूरे इलाके में मातम पसरा है, उनके मोहल्ले वाले उन्हें याद करते हुए कह रहे थे, मनप्रीत हमेशा कहता था कि ‘देश के काम अगर आ सकूं तो खुद को किस्मतवाला समझूंगा और आज वो किस्मत वाला बन गया।’ मनप्रीत तीन भाई-बहन थे और वो ही सबसे बड़े थे।
कर्नल, मेजर और DSP हुए शहीद
आपको बता दें कि सेना को अनंतनाग में आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी, जिसके लिए सर्च ऑप्रेशन चलाया गया था इसी ऑप्रेशन का मुआयना करने के लिए कमांडिंग ऑफ़िसर कर्नल मनप्रीत सिंह वहां पहुंचे थे लेकिन जैसे ही वो गाड़ी से उतरे आतंकियों ने उन पर हमला कर दिया, इससे पहले कि वो अस्पताल पहुंचते, उन्होंने हमेशा के लिए अपनी आंखें बंद कर ली। इस एनकाउंटर में कर्नल के अलावा मेजर आशीष धोनैक और डीएसपी हुमायूं भट भी शहीद हुए हैं।

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