किच्छा: सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाया गया 50 साल पुराना मां काली मंदिर; भव्य शोभायात्रा के साथ मूर्ति विस्थापित, प्रशासन ने ढहाया ढांचा
किच्छा (27 अप्रैल 2026): किच्छा-पंतनगर सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत सोमवार को प्रशासन ने एक बड़ी बाधा को सफलतापूर्वक दूर कर लिया। हल्द्वानी बाईपास स्थित लगभग 50 वर्ष पुराने मां काली मंदिर को लोक निर्माण विभाग (PWD) की भूमि से हटा दिया गया है। खास बात यह रही कि पूरी कार्रवाई धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करते हुए और अखाड़े की सहमति से शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।
PWD की भूमि पर था मंदिर, मिला था नोटिस
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह मंदिर सड़क विस्तार के दायरे में आ रहा था और PWD की भूमि पर निर्मित था। परियोजना को गति देने के लिए प्रशासन ने मंदिर का संचालन कर रहे आनंद अखाड़ा को पूर्व में नोटिस जारी किया था। कई दौर की वार्ता के बाद, विकास कार्य की महत्ता को समझते हुए अखाड़े ने मूर्ति को अन्यत्र स्थानांतरित करने पर सहमति जताई।
धार्मिक उत्साह के साथ मूर्ति विदाई
सहमति के बाद, मां काली की मूर्ति को अखाड़े द्वारा संचालित एक अन्य मंदिर में ले जाने का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर क्षेत्र में एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। श्रद्धालुओं ने:
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पारंपरिक रीति-रिवाजों और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ माता की विदाई की।
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ढोल-नगाड़ों और धार्मिक भजनों के साथ मूर्ति को नए स्थान पर पहुंचाया।
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विसर्जन और पुनर्स्थापना की प्रक्रिया को पूरी श्रद्धा के साथ संपन्न किया।
बुलडोजर की कार्रवाई और सुरक्षा इंतजाम
मूर्ति के सुरक्षित स्थानांतरण के बाद, सोमवार सुबह पुलिस और प्रशासन की टीम बुलडोजर के साथ मौके पर पहुँची। मंदिर के रिक्त ढांचे को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू की गई। इस दौरान:
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सुरक्षा के मद्देनजर भारी पुलिस बल तैनात रहा।
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किसी भी प्रकार के विरोध या अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए लामाचौड़ और आसपास के क्षेत्रों में सतर्कता बरती गई।
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प्रशासन ने स्पष्ट किया कि ढांचा हटाने से पहले यह सुनिश्चित किया गया कि सभी धार्मिक विग्रह (मूर्तियां) पहले ही हटा ली गई हों।
विकास के लिए चौड़ीकरण अनिवार्य
स्थानीय प्रशासन और PWD का कहना है कि किच्छा-पंतनगर मार्ग पर यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इस मार्ग के चौड़ीकरण से:
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क्षेत्र में लगने वाले भीषण जाम से मुक्ति मिलेगी।
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पंतनगर एयरपोर्ट और ऊधमसिंह नगर के अन्य हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी।
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व्यापारिक और औद्योगिक वाहनों का आवागमन सुगम होगा।
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