उत्तराखंड में सड़कों और पुलों की सुरक्षा के लिए बड़ा कदम: अब सभी ट्रकों के लिए समान होगा भार का नियम

खबर शेयर करें -

देहरादून। उत्तराखंड में सड़कों और पुलों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए परिवहन विभाग एक नई और सख्त व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है। इसके तहत अब राज्य के भीतर संचालित होने वाले सभी ट्रकों की अधिकतम भार वहन क्षमता को एक समान किया जाएगा। इस नए नियम के लागू होने के बाद, अब राष्ट्रीय परमिट (National Permit) वाले भारी ट्रकों को भी प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में 16.200 टन से अधिक भार ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

यह भी पढ़ें 👉  हल्द्वानी नगर निगम में आठ मनोनीत पार्षदों की नियुक्ति: शासन ने जारी की सूची, अब 68 हुई पार्षदों की कुल संख्या

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, परिवहन विभाग ने राज्य परमिट पर संचालित होने वाले ट्रकों के लिए अधिकतम भार वहन क्षमता 16.200 टन निर्धारित की हुई है, जबकि राष्ट्रीय परमिटधारकों को इस मानक से छूट मिली हुई थी। इस छूट का फायदा उठाकर राष्ट्रीय परमिट वाले ट्रक प्रदेश में अधिक भार लेकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं। शुरुआत में परिवहन विभाग राज्य परमिट वाले ट्रकों की भार क्षमता बढ़ाने पर विचार कर रहा था, लेकिन लोक निर्माण विभाग (PWD) की रिपोर्ट के बाद विभाग ने अपना फैसला बदल दिया। लोक निर्माण विभाग ने सचेत किया है कि प्रदेश में कई पुल बेहद पुराने और सीमित क्षमता वाले हैं, जो अत्यधिक भारी वाहनों का वजन सहन नहीं कर सकते। हालांकि, इन पुलों को अपग्रेड करने का काम चल रहा है, लेकिन वर्तमान में भारी ट्रकों का गुजरना सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा खतरा बना हुआ है।

यह भी पढ़ें 👉  हरेला और जगन्नाथ रथ यात्रा आस्था, प्रकृति और संस्कृति का अद्भुत संगम: कमलेश चंदोला; भाजपा नेता ने दीं शुभकामनाएँ, किया वृक्षारोपण का आह्वान

इसी चिंता को देखते हुए परिवहन विभाग अब एक ऐसा साझा नियम बनाने जा रहा है जो राज्य और राष्ट्रीय, दोनों ही परमिटधारकों पर समान रूप से लागू होगा। इस संबंध में जानकारी देते हुए अपर परिवहन आयुक्त एसके सिंह ने बताया कि इस नई व्यवस्था का उद्देश्य राज्य में परिवहन गतिविधियों को बाधित करना कतई नहीं है, बल्कि प्रदेश के पुराने पुलों और सड़कों को सुरक्षित रखना तथा किसी भी संभावित हादसे को रोकना है।

यह भी पढ़ें 👉  मुख्यमंत्री धामी ने दी हरेला पर्व की बधाई: बोले— 'प्रकृति संरक्षण के लिए अधिक से अधिक वृक्षारोपण कर निभाएं अपना सामाजिक दायित्व'
Ad