राजकुमार के कांग्रेस में जाने के बाद भाजपा ने महिला दांव से साधी नई सियासी बिसात, क्या रुद्रपुर से मीना होंगी भाजपा का चेहरा?”

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राजू अनेजा,रुद्रपुर/देहरादून। तराई की राजनीति में घटनाक्रम तेजी से करवट ले रहा है।तराई की सियासत अब सीधी लड़ाई नहीं, बल्कि शह-मात का खेल बन चुकी है।भाजपा के पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल के कांग्रेस में शामिल होते ही रुद्रपुर सीट का सियासी गणित पूरी तरह बदल गया है। इसी के जवाब में भाजपा ने भी त्वरित रणनीति अपनाते हुए कांग्रेस की चर्चित नेत्री मीना शर्मा को अपने पाले में शामिल कर “महिला कार्ड” खेल दिया है।

 

देहरादून में प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने मीना शर्मा को पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस कदम को भाजपा का सीधा “काउंटर मूव” माना जा रहा है, जिसने मुकाबले को और ज्यादा रोचक बना दिया है।

एक वार उधर से, पलटवार इधर से… महिला कार्ड से भाजपा ने बदला पूरा गेम

 

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साफ है—ठुकराल के कांग्रेस में जाने से जो खालीपन और चुनौती बनी, भाजपा ने उसे मौके में बदल दिया।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो भाजपा इस बार रुद्रपुर सीट पर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। ठुकराल के कांग्रेस से चुनाव लड़ने की स्थिति में पार्टी महिला प्रत्याशी के रूप में मीना शर्मा को आगे कर सकती है। इससे न केवल महिला मतदाताओं को साधने की कोशिश होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर बने असंतोष को भी संतुलित किया जा सकेगा।

 

यानी लड़ाई अब सिर्फ नेता बनाम नेता नहीं, बल्कि रणनीति बनाम रणनीति की हो चुकी है। महिला कार्ड के जरिए भाजपा जहां वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश करेगी, वहीं ठुकराल अपने पुराने जनाधार के दम पर कांग्रेस को मजबूत करने में जुटेंगे।

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इधर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही रुद्रपुर से चुनाव लड़ने के संकेत देकर इस सीट को हाई-प्रोफाइल बना चुके हैं। ऐसे में अब यह सीट प्रदेश की सबसे चर्चित सीटों में शामिल होती जा रही है।

 

भाजपा में शामिल होने के बाद मीना शर्मा ने कहा कि वह पार्टी की नीतियों और नेतृत्व से प्रभावित होकर यह निर्णय लिया है और जनता की सेवा के लिए पूरी प्रतिबद्धता से काम करेंगी। वहीं महेंद्र भट्ट ने इसे संगठन के विस्तार और मजबूती की दिशा में अहम कदम बताया।

ठुकराल का वार, भाजपा का ‘मीना पलटवार’

 

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अब देखना यह है कि इस शह-मात के खेल में आखिरी चाल किसकी भारी पड़ती है…!

अब सबसे बड़ा सवाल यही—क्या भाजपा रुद्रपुर में “मीना कार्ड” खेलेगी या फिर कोई बड़ा चेहरा मैदान में उतरेगा? लेकिन इतना तय है कि ठुकराल की एंट्री के बाद मुकाबला अब सीधा नहीं, बल्कि रणनीति की जंग बन चुका है।