उत्तराखंड में AI बना राजनीतिक हथियार: पूर्व सीएम हरीश रावत ने दर्ज कराया मुकदमा, साइबर पुलिस एक्टिव

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देहरादून: उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर राजनीतिक माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इस तकनीक के माध्यम से राजनेताओं की छवि पर असर पड़ने लगा है, जिसे देखते हुए साइबर पुलिस अब सक्रिय हो गई है।

💥 AI से छवि धूमिल करने का आरोप

  • 2027 चुनाव से पहले सभी पार्टियाँ प्रचार-प्रसार में जुटी हैं, लेकिन इसी बीच नेता AI की मदद से अपनी छवि को धूमिल करने के आरोप लगा रहे हैं।

  • ताजा मामला: पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का है, जिन्होंने AI की मदद से अपनी छवि खराब करने के मामले में देहरादून की नेहरू कॉलोनी में मुकदमा दर्ज कराया है।

  • इस घटना ने यह आशंका बढ़ा दी है कि 2027 के चुनाव में AI का गलत इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हो सकता है।

👮 साइबर पुलिस की तैयारी

मामले के सामने आने के बाद साइबर पुलिस ने अपनी कमर कस ली है।

  • ASP कुश मिश्रा ने बताया कि AI से बनी वीडियो को रोकना मुश्किल है, लेकिन वीडियो प्रकाशित होने के बाद व्यक्ति पर विभिन्न धाराओं में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

  • उन्होंने बताया कि बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) के तहत सेक्शन 353 और 336 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

  • सहयोग पोर्टल के माध्यम से ऐसी वीडियो को रोकने और हटाने का प्रयास किया जाता है।

  • टूल खरीद: आईजी साइबर नीलेश आनंद भरने के निर्देश में AI के टूल्स को खरीदा और किराए पर लिया गया है, जिसकी मदद से किसी भी व्यक्ति की URL तक पहुँचकर कार्रवाई की जा सकती है।

⚠️ लोकतंत्र के लिए चुनौती

एएसपी कुश मिश्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अपने आप में न तो अच्छा है और न ही बुरा, लेकिन इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है, यही असल सवाल है।

  • उत्तराखंड की राजनीति में AI अब राजनीतिक हथियार बनता जा रहा है।

  • फर्जी वीडियो, डीपफेक ऑडियो और एडिटेड तस्वीरें न केवल नेताओं की छवि को नुकसान पहुँचा रही हैं, बल्कि आम जनता को भी भ्रमित कर रही हैं।

  • विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में AI आधारित दुष्प्रचार लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है।

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