मानवता की मिसाल: कैंसर अस्पताल, प्रशासन और सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रयास से अनाथ मासूम बच्ची सुरक्षित लौटी पिथौरागढ़

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हल्द्वानी। विपदा की घड़ी में जब अपने भी साथ छोड़ देते हैं, तब समाज का मानवीय चेहरा और कुछ फरिश्ते ही उम्मीद की नई किरण बनकर उभरते हैं। हल्द्वानी स्थित डॉ. सुशीला तिवारी (एसटीएच) कैंसर अस्पताल में इंसानियत, निस्वार्थ समाज सेवा और प्रशासनिक तत्परता की एक ऐसी ही भावुक कर देने वाली मिसाल देखने को मिली है। पिथौरागढ़ जिले के ग्राम बाकरी निवासी 37 वर्षीय पूजा धामी पिछले दो-तीन महीनों से सुशीला तिवारी कैंसर अस्पताल में भर्ती थीं, लेकिन दुर्भाग्यवश इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। इस त्रासदी का सबसे मार्मिक पहलू यह रहा कि अस्पताल में उनकी देखरेख केवल उनकी 13 वर्षीय मासूम बेटी ‘भावना’ ही कर रही थी। मृतका के पति गोविंद सिंह धामी (55 वर्ष) रीढ़ की हड्डी टूटने के कारण पिथौरागढ़ में ही बिस्तर पर पड़े हैं और चलने-फिरने में पूरी तरह अक्षम हैं। घर पर भावना के अलावा 10 वर्ष की छोटी बहन दिव्यांशी और महज ढाई साल का मासूम भाई सौरभ है। माँ का साया उठने से 13 साल की मासूम इस बड़े अस्पताल में बिल्कुल अकेली और बेसहारा रह गई थी, जिसके पास न तो घर जाने का कोई साधन था और न ही कोई सुरक्षित अभिभावक।
अस्पताल स्टाफ ने जुटाया चंदा; ₹5,000 में एंबुलेंस और ₹20,000 की नकद मदद सौंपी
अक्सर सरकारी अस्पतालों से बदइंतजामी की खबरें ही सामने आती हैं, लेकिन सुशीला तिवारी कैंसर अस्पताल के आई बैंक एवं कैंसर अस्पताल के प्रभारी गोविंद पांडे, भास्कर भट्ट, अमनदीप कौर, निशा जोशी और समस्त स्टाफ ने इंसानियत का मिसाल कायम किया। स्टाफ ने बच्ची की विदारक स्थिति देखकर बिना किसी कागजी कार्यवाही का इंतजार किए आपस में चंदा इकट्ठा किया और लगभग ₹5,000 जुटाकर तत्काल एंबुलेंस की व्यवस्था की। इसके अलावा अनाथ हुई बच्ची के भविष्य और तात्कालिक जरूरतों को देखते हुए पूरे स्टाफ ने अपनी ओर से ₹15,000 से ₹20,000 की नकद आर्थिक सहायता राशि भी उस मासूम के हाथों में सौंपी।
सामाजिक कार्यकर्ता पीयूष जोशी की पहल; डीएम और पुलिस ने त्वरित दिखाया एक्शन
इस पूरी मुहिम में क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता पीयूष जोशी की भूमिका निर्णायक रही। वे एक अन्य घायल व्यक्ति को अस्पताल लेकर पहुंचे थे, जहां उन्हें आई बैंक प्रभारी के जरिए बच्ची की स्थिति का पता चला। पीयूष जोशी ने तुरंत नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल और पूर्व सांसद अजय टमटा को मामले की जानकारी दी। डीएम ललित मोहन रयाल ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल एक्शन लिया और एसडीएम ए.बी. वाजपेई को सुरक्षा के निर्देश दिए। एसडीएम ने त्वरित कदम उठाते हुए पीआरडी जवान भुवन चंद्र को एस्कॉर्ट के रूप में तैनात किया। वहीं, पुलिस महकमे से सब इंस्पेक्टर नरेंद्र कुमार, अरुण सिंह राणा और एक महिला पीआरडी जवान को भी बच्ची की सुरक्षा के लिए भेजा गया। आरएसएस के पूर्व कार्यकर्ता चंद्रशेखर भट्ट ने भी इस पूरी प्रक्रिया में सहयोग दिया।
देर रात पिथौरागढ़ के लिए रवाना हुई बच्ची; क्षेत्र में हो रही भूरि-भूरि प्रशंसा
तमाम कागजी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद, रात के लगभग 10:30 बजे प्रशासन, पुलिस और अस्पताल स्टाफ की कड़ी सुरक्षा व मदद के साये में 13 वर्षीय भावना एंबुलेंस के माध्यम से सुरक्षित पिथौरागढ़ के लिए रवाना हो सकी। यह घटना उन लोगों के लिए भी एक कड़ा संदेश है जो समाज सेवा को महज दिखावा या जरिया मानते हैं। सुशीला तिवारी अस्पताल के स्टाफ, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल और पुलिस प्रशासन के इस संयुक्त मानवीय प्रयास की पूरे क्षेत्र और प्रदेश में भूरि-भूरि प्रशंसा हो रही है।
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