गौला नदी के कटाव से आक्रोशित ग्रामीणों ने SDM को सौंपा ज्ञापन: उपजिलाधिकारी कार्यालय में किया प्रदर्शन, स्थायी तटबंध और मुआवजे की मांग

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लालकुआं। गौला नदी के लगातार बढ़ते उफान और खतरनाक कटाव के कारण दर्जनों गांवों तथा उपजाऊ कृषि भूमि पर मंडरा रहे अस्तित्व के खतरे को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश लगातार गहराता जा रहा है। गुरुवार (1 अक्टूबर 2026) को ‘गौला नदी स्थायी तटबंध निर्माण संघर्ष समिति’ के बैनर तले एकजुट हुए बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने तहसील परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया और उपजिलाधिकारी (SDM) रेखा कोहली को ज्ञापन सौंपकर तत्काल बाढ़ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग उठाई।
कैबिनेट मंत्री के निर्देशों पर अमल की मांग; खनन राजस्व का हिस्सा तटबंध निर्माण में खर्च करने की अपील
संघर्ष समिति ने ज्ञापन के माध्यम से याद दिलाया कि बीते 27 सितंबर को लालकुआं में आयोजित बैठक के दौरान कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा ने जिला प्रशासन को गौला नदी में बाढ़ सुरक्षा हेतु स्थायी तटबंध का विस्तृत एस्टीमेट (Estimate) तैयार करने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। ग्रामीणों ने मांग की कि इन निर्देशों पर अविलंब अमल कर धरातल पर निर्माण कार्य शुरू कराया जाए। साथ ही ग्रामीणों ने पुरजोर मांग रखी कि देवरामपुर, लालकुआं और इमलीघाट गेटों से सरकार को मिलने वाले खनन राजस्व की एक निर्धारित राशि को केवल गौला नदी के स्थायी तटबंध निर्माण और संरक्षण कार्यों में ही खर्च किया जाए, ताकि कटाव पर प्रभावी रोक लग सके।
हाथी कॉरिडोर क्षेत्र में चुगान शुरू करने व प्रभावितों को मुआवजे की पुरजोर मांग
ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान दिलाते हुए कहा कि इंद्रानगर और इमलीघाट क्षेत्रों में हाथी कॉरिडोर (Elephant Corridor) के कारण नदियों से चुगान (उपखनिज निकासी) कार्य बंद है, जिससे नदी का तल ऊंचा हो गया है और पानी सीधा ग्रामीण आबादी व खेतों का रुख कर रहा है। उन्होंने नियमों के तहत इन क्षेत्रों में चुगान शुरू कराने की मांग की। इसके साथ ही पिछले 5 वर्षों में नदी के भीषण कटाव के कारण जो कृषि भूमि और मकान नदी में समा चुके हैं, उनका त्वरित सर्वे कराकर पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देने की बात कही।
ज्ञापन सौंपने वालों में उमेश चन्द्र भट्ट, राजेंद्र सिंह, रमेश सिंह, भूपेश नैनवाल, कंचन सिंह मोरा, दीवान सिंह भाकुनी और दर्शन सिंह कोरंगा सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी शामिल रहे। ग्रामीणों ने चेताया कि यदि मानसून से पूर्व ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आगामी दिनों में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
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