राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन हिंसा और हाथापाई किसी कीमत पर स्वीकार नहीं : राजकुमार फुटेला
राजू अनेजा,किच्छा। किच्छा निकाय चुनाव के दौरान विधायक तिलक राज बेहड़ के साथ हुई मारपीट की घटना को लेकर उत्तरांचल पंजाबी महासभा ने कड़ा आक्रोश जताते हुए घटना की घोर निंदा की है। महासभा ने कहा कि चुनावी मैदान में राजनीतिक विरोध और मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन राजनीतिक विरोध के नाम पर हिंसा, मारपीट और कानून हाथ में लेने की प्रवृत्ति को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उत्तरांचल पंजाबी महासभा के प्रदेश महामंत्री राजकुमार फुटेला ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति और हर राजनीतिक दल को अपनी बात रखने तथा विरोध दर्ज कराने का अधिकार है, लेकिन इसकी भी एक लोकतांत्रिक सीमा और मर्यादा होती है। मतभेदों का जवाब तर्क से होना चाहिए, ताकत और हाथापाई से नहीं।
वरिष्ठ जनप्रतिनिधि के साथ ऐसी घटना बेहद गंभीर
राजकुमार फुटेला ने कहा कि विधायक तिलक राज बेहड़ लंबे समय से उत्तराखंड की राजनीति में सक्रिय जनप्रतिनिधि हैं। ऐसे वरिष्ठ जनप्रतिनिधि के साथ चुनावी माहौल में मारपीट की घटना होना बेहद गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि के साथ इस प्रकार का व्यवहार केवल एक व्यक्ति के सम्मान का मामला नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी व्यवस्था की गरिमा से भी जुड़ा हुआ विषय है।
उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान यदि जनप्रतिनिधि ही सुरक्षित नहीं रहेंगे और राजनीतिक विरोध हिंसा का रूप लेने लगेगा तो आम जनता के बीच भी गलत संदेश जाएगा।
राजनीतिक विरोध का जवाब हाथापाई नहीं, लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाए
महासभा ने कहा कि चुनाव में हार-जीत और राजनीतिक मतभेद लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। जनता के बीच अपनी बात रखने के लिए हर राजनीतिक दल और प्रत्याशी को पूरा अधिकार है। लेकिन किसी के साथ मारपीट करना, अभद्रता करना या दबाव बनाने का प्रयास करना लोकतंत्र की भावना के विपरीत है।
फुटेला ने कहा कि राजनीतिक विरोध कितना भी तीखा क्यों न हो, उसकी अभिव्यक्ति लोकतांत्रिक दायरे में रहकर ही होनी चाहिए। हिंसा को राजनीतिक विरोध का माध्यम बनाने की प्रवृत्ति पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।
ऐसी घटनाओं को सामान्य मानकर नजरअंदाज करना खतरनाक
उत्तरांचल पंजाबी महासभा ने कहा कि चुनावी राजनीति में छोटी-बड़ी घटनाओं को यदि समय रहते गंभीरता से नहीं लिया गया तो आने वाले समय में स्थिति और बिगड़ सकती है। आज यदि मारपीट जैसी घटना को सामान्य मान लिया गया तो कल राजनीतिक विरोध और अधिक हिंसक रूप ले सकता है।
महासभा ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति की पूरी गुंजाइश है, लेकिन हिंसा की कोई गुंजाइश नहीं हो सकती। कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है और चुनावी माहौल में यह जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
दोषियों को चिन्हित कर हो कड़ी कानूनी कार्रवाई
उत्तरांचल पंजाबी महासभा ने प्रशासन से मांग की है कि किच्छा निकाय चुनाव के दौरान हुई इस घटना की निष्पक्ष जांच कर मारपीट में शामिल लोगों को चिन्हित किया जाए और उनके खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाए।
महासभा ने कहा कि कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जो भी व्यक्ति कानून व्यवस्था और लोकतांत्रिक मर्यादा को चुनौती देता है, उसके खिलाफ निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
लोकतंत्र की मजबूती के लिए राजनीतिक मर्यादा जरूरी
फुटेला ने कहा कि लोकतंत्र की असली ताकत विचारों के संघर्ष में है, हिंसा के प्रदर्शन में नहीं। राजनीतिक दलों और कार्यकर्ताओं को चुनाव के दौरान संयम और लोकतांत्रिक मर्यादा का पालन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उत्तरांचल पंजाबी महासभा हिंसा की राजनीति के खिलाफ है और लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून व्यवस्था तथा जनप्रतिनिधियों के सम्मान के पक्ष में खड़ी है। महासभा ने प्रशासन से पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग दोहराई।
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राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन हिंसा और हाथापाई किसी कीमत पर स्वीकार नहीं : राजकुमार फुटेला