मतगणना से पहले हरदा का ‘लाठी’ वाला बयान, बोले—जीत की चोरी न होने दें; कार्यकर्ता मुस्तैद रहें

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किच्छा-सिरौली की मतगणना आज, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद खुला परिणाम का रास्ता; रावत ने कार्यकर्ताओं से कहा—अपने वोट की रक्षा करनी है

 

राजू अनेजा, किच्छा। किच्छा और सिरौलीकलां नगर पालिका चुनाव की मतगणना को लेकर करीब दो सप्ताह से चल रही कानूनी जंग के बीच बुधवार को आखिरकार वोटों की गिनती होने जा रही है। इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के एक बयान ने मतगणना से पहले सियासी तापमान बढ़ा दिया है। किच्छा पहुंचे रावत ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मतगणना के दौरान मुस्तैद रहने और अपने वोट की रक्षा करने का आह्वान किया।
रावत ने कार्यकर्ताओं से कहा कि जीत की चोरी नहीं होने देनी है। उन्होंने यहां तक कहा कि मतगणना के दिन कार्यकर्ता लाठी लेकर पहुंचें और पूरी तरह मुस्तैद रहें। रावत के इस बयान को लेकर अब सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

 

22 सितंबर के मतदान के बाद थम गई थी मतगणना

दरअसल, किच्छा और सिरौलीकलां नगर पालिका के लिए 22 सितंबर को मतदान हुआ था। मतदान के दौरान और उसके बाद किच्छा में राजनीतिक टकराव की स्थिति बनी थी। इसके बाद मतगणना को लेकर विवाद खड़ा हो गया और परिणाम घोषित नहीं हो सके। मामला पहले हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
हाई कोर्ट ने 30 सितंबर को मतगणना तीन सप्ताह के भीतर कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश के प्रभाव पर रोक लगाते हुए किच्छा और सिरौलीकलां में मतगणना कराने तथा परिणाम घोषित करने के निर्देश दिए। इसके बाद जिला निर्वाचन अधिकारी ने 7 अक्टूबर को सुबह आठ बजे से मतगणना कराने का कार्यक्रम जारी किया।

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‘वोट का अपहरण नहीं होने देना है’—रावत

किच्छा में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए हरीश रावत ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने चुनाव के दौरान मतपेटियों को लेकर उठे विवाद का सामना किया और अपने वोट की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से मतगणना स्थल पर सतर्क रहने का आह्वान किया।
रावत ने कहा कि जनता अपना फैसला सुना चुकी है और अब उस फैसले की रक्षा करना कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि मतगणना के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं होने देनी है।

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‘लाठी लेकर आएं’ बयान पर सियासत गर्म

रावत के ‘लाठी लेकर आने’ वाले बयान ने मतगणना से पहले राजनीतिक बहस को और गरमा दिया है। हालांकि रावत ने इसे कार्यकर्ताओं के मुस्तैद रहने और अपने वोट की रक्षा करने के संदर्भ में कहा, लेकिन बयान के शब्दों को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।
मतगणना को लेकर प्रशासन और पुलिस पहले ही सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अलर्ट है। किच्छा और सिरौलीकलां में मतगणना शांतिपूर्ण तरीके से कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है।

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अब नजरें मतगणना पर—किसके पक्ष में खुलेगा फैसला?

22 सितंबर को पड़े वोटों का फैसला करीब दो सप्ताह बाद सामने आने जा रहा है। कानूनी दांव-पेंच, चुनावी विवाद और दोनों दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मतपेटियों से निकलने वाला जनादेश किसके पक्ष में जाता है।
किच्छा और सिरौलीकलां में आज सिर्फ वोटों की गिनती नहीं होगी, बल्कि पिछले कई दिनों से चल रहे राजनीतिक विवाद के बाद जनता के फैसले की तस्वीर भी साफ होगी।
अगर आप चाहें तो इसकी हेडिंग को और ज्यादा धमाकेदार/वेब पोर्टल वाली बना सकते हैं, जैसे: “मतगणना से पहले हरदा ने फूंका सियासी बिगुल—‘लाठी लेकर आओ, जीत की चोरी नहीं होने देंगे’”।

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