पैतृक गांव पंचूर में भावुक हुए सीएम योगी: गढ़वाली बोली में दिया ‘भात’ का न्यौता, बंजर खेतों पर जताई चिंता

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उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने पैतृक गांव पंचूर (यमकेश्वर) में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान के बाद एक अलग ही अंदाज में नजर आए। मंदिर परिसर में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा और यज्ञ संपन्न होने के बाद जब सीएम योगी स्थानीय ग्रामीणों से मिले, तो उन्होंने अपनी मातृभाषा गढ़वाली में बात कर सबका दिल जीत लिया。 उन्होंने ग्रामीणों से अपनत्व के साथ कहा, “सब भात खैकन जरूर जाईं” (सब खाना खाकर ही जाना), जिसे सुनकर वहां मौजूद लोग भावुक हो गए। ग्रामीणों का कहना था कि देश के सबसे बड़े राज्य की कमान संभालने के बावजूद योगी आदित्यनाथ अपनी मिट्टी और बोली-भाषा से गहराई से जुड़े हुए हैं。

इस दौरान मुख्यमंत्री ने पहाड़ों में बंजर हो रहे खेतों और पलायन की समस्या पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने ग्रामीणों को स्वरोजगार और जैविक खेती से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हुए बाबा रामदेव का उदाहरण दिया। सीएम ने कहा कि जिस तरह बाबा रामदेव जैविक उत्पादों के माध्यम से कार्य कर रहे हैं, उसी तरह क्षेत्रवासियों को भी अपनी माटी से जुड़कर खेतों को उपजाऊ बनाना चाहिए。 उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनें और शहरों की ओर पलायन करने के बजाय अपनी जमीन पर ही स्वरोजगार के अवसर तलाशें。