कांग्रेस की ‘जन आक्रोश रैली’ में उमड़ा जनसैलाब; महंगाई, बेरोजगारी और अंकिता हत्याकांड को लेकर सरकार को घेरा

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देहरादून: उत्तराखंड कांग्रेस ने शनिवार शाम राजधानी के चकराता रोड पर बल्लूपुर चौक से बल्लीवाला चौक तक एक विशाल ‘जन आक्रोश रैली’ का आयोजन किया. इस रैली के माध्यम से पार्टी ने प्रदेश की धामी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए विभिन्न जनहित के मुद्दों पर तीखा हमला बोला.

शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी और अनूठा प्रदर्शन

रैली में प्रदेश कांग्रेस का समस्त शीर्ष नेतृत्व एकजुट नजर आया:

  • प्रमुख नेता: रैली में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत मुख्य रूप से शामिल हुए.

  • हरीश रावत का अंदाज: कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने के लिए पूर्व सीएम हरीश रावत पहले कुछ दूर पैदल चले और उसके बाद मोटरसाइकिल पर सवार होकर प्रदर्शन का हिस्सा बने.

इन मुख्य मुद्दों पर गरमाई राजनीति

कांग्रेस ने राज्य सरकार को घेरने के लिए पांच प्रमुख बिंदुओं को आधार बनाया:

  1. महंगाई: आसमान छूती महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है.

  2. बेरोजगारी: प्रदेश में बेरोजगारी चरम पर है और युवाओं के पास रोजगार की कोई ठोस योजना नहीं है.

  3. अंकिता भंडारी हत्याकांड: अंकिता भंडारी के परिवार को न्याय दिलाने में सरकार की उदासीनता को दुर्भाग्यपूर्ण बताया गया.

  4. छात्र उत्पीड़न: पुलिस प्रशासन द्वारा छात्रों के साथ किए जा रहे अमानवीय व्यवहार और मारपीट की घटनाओं की निंदा की गई.

  5. कानून व्यवस्था: राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर चिंता जताई गई.

नेताओं के तीखे प्रहार

  • गणेश गोदियाल: उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता त्रस्त है और कांग्रेस जनता की आवाज बनकर तब तक संघर्ष जारी रखेगी जब तक न्याय नहीं मिल जाता.

  • हरीश रावत: रावत ने कहा कि शांति और सुरक्षा वाली उत्तराखंड की पहचान अब खतरे में है और यह रैली जनता के उस गुस्से का प्रतीक है जिसे अब सरकार अनदेखा नहीं कर सकती.

पोस्टर फाड़ने के आरोप और पक्षपात का दावा

कार्यक्रम संयोजक रितेश ने सरकार पर पक्षपात का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:

  • रैली के लिए लगाए गए 50 से 60 बैनर और पोस्टर तड़के फाड़ दिए गए.

  • उन्होंने दावा किया कि भाजपा के पुराने पोस्टर सुरक्षित हैं, लेकिन विपक्ष में होने के कारण कांग्रेस को जानबूझकर टारगेट किया जा रहा है.