
राजू अनेजा,किच्छा।कोरोना काल की भयावह तस्वीरों के बीच जब लोग अपने-अपने घरों में सिमट रहे थे, उस दौर में किच्छा के हरविंदर सिंह चुघ ने मानवता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया। मास्क की भारी किल्लत के बीच जब जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाना मुश्किल हो रहा था, तब हरविंदर ने अपनी आस्था का प्रतीक मानी जाने वाली दस्तारें तक कुर्बान कर दीं।
लॉकडाउन के दौरान बाजारों में कपड़े की कमी के कारण मास्क बनाना चुनौती बन गया था। ऐसे में हरविंदर सिंह चुग ने बिना किसी हिचकिचाहट अपनी दस्तारें मास्क बनाने के लिए दे दीं, ताकि कोई भी व्यक्ति बिना सुरक्षा के न रहे। उनके इस जज्बे ने न सिर्फ लोगों को भावुक किया, बल्कि पूरे सिख समाज को भी प्रेरित किया। देखते ही देखते कई अन्य सिख भाइयों ने भी अपनी दस्तारें देने की पेशकश कर दी।
समय बदला, हालात सुधरे, लेकिन हरविंदर का सेवा भाव नहीं बदला। आज वही हरविंदर सिंह जरूरतमंदों के लिए खून उपलब्ध कराकर जिंदगी बचाने का काम कर रहे हैं। चाहे रात हो या दिन, किसी को भी खून की जरूरत पड़ने पर हरविंदर सबसे पहले खड़े नजर आते हैं।
उनकी यह सोच साफ है—”सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है”।
कोरोना काल में दस्तारें देकर सुरक्षा दी और अब खून देकर जिंदगी बचा रहे हैं, हरविंदर सिंह चुघ आज समाज के लिए एक जीवंत प्रेरणा बन चुके हैं।
ऐसे लोग ही बताते हैं कि इंसानियत आज भी जिंदा है।
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