देहरादून एयरपोर्ट पर ‘ऐप आधारित’ टैक्सियों की एंट्री; स्थानीय संचालकों का कड़ा विरोध, पुलिस की चेतावनी

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देहरादून (जौलीग्रांट) | 18 फरवरी, 2026: देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर जल्द ही ओला, उबर और रैपिडो जैसी ऐप-बेस्ड कैब सेवाएं शुरू होने जा रही हैं। जहाँ एक ओर यात्रियों के लिए यह बड़ी राहत की खबर है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय टैक्सी यूनियन ने इसे अपने अस्तित्व पर खतरा बताते हुए आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।


📱 बदलाव: अब मिलेंगे आवागमन के कई विकल्प

एयरपोर्ट पर अब तक केवल जौलीग्रांट प्रीपेड टैक्सी यूनियन का ही एकाधिकार था, लेकिन सरकार के नए दिशा-निर्देशों के बाद कैब एग्रीगेटर्स के लिए रास्ते खुल गए हैं:

  • निर्णय: सरकार से लाइसेंस प्राप्त कोई भी ऐप-आधारित कंपनी अब एयरपोर्ट से अपनी सेवाएं दे सकेगी।

  • एयरपोर्ट निदेशक का रुख: एयरपोर्ट निदेशक भूपेश सीएच नेगी ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंस प्राप्त कंपनियों को रोकने का अधिकार एयरपोर्ट अथॉरिटी के पास नहीं है। कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का काम है।

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🚩 स्थानीय संचालकों का आक्रोश: “छीना जा रहा है रोजगार”

स्थानीय टैक्सी यूनियन और जनप्रतिनिधि इस फैसले के सख्त खिलाफ हैं। उनका तर्क भावनात्मक और आर्थिक दोनों है:

  • भूमि त्याग का हवाला: सभासद ईश्वर रौथान और राजेश भट्ट का कहना है कि यहाँ के मूल निवासियों ने एयरपोर्ट निर्माण और विस्तार के लिए अपनी उपजाऊ भूमि दी थी। इसके बदले उन्हें टैक्सी संचालन के रूप में रोजगार मिला था, जिसे अब ऑनलाइन कंपनियां छीन रही हैं।

  • अधिकारों का हनन: यूनियन ने उप जिलाधिकारी (SDM) को पत्र भेजकर मांग की है कि स्थानीय लोगों के हक और रोजगार को संरक्षित किया जाए।

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👮 पुलिस और प्रशासन का सख्त रुख

विरोध की आहट को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने भी अपनी रणनीति साफ कर दी है:

  • चेतावनी: पुलिस ने टैक्सी संचालकों को औपचारिक पत्र जारी कर कहा है कि यदि बिना विधिक अनुमति (Legal Permission) के धरना-प्रदर्शन या कामकाज में बाधा डाली गई, तो कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

  • सुरक्षा: एयरपोर्ट परिसर में यात्रियों की सुरक्षा और सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

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📊 एक नजर में विवाद के मुख्य बिंदु

पक्ष तर्क / स्टैंड
यात्री/सरकार सस्ता और पारदर्शी आवागमन, प्रतिस्पर्धा से बेहतर सेवा।
स्थानीय यूनियन भूमि देने के बदले रोजगार का अधिकार, ऑनलाइन कैब से रोजी-रोटी का संकट।
एयरपोर्ट अथॉरिटी नियमों के तहत लाइसेंस प्राप्त कंपनियों को प्रवेश देना अनिवार्य।
पुलिस कानून-व्यवस्था और यातायात में बाधा डालने पर गिरफ्तारी संभव।