…तो उत्तराखंड के 20 हजार से ज्यादा शिक्षक लोकसभा चुनाव में नहीं डालेंगे वोट

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देहरादून. प्रमोशन, ट्रांसफर पॉलिसी में काउंसलिंग की व्यव्स्था समेत शिक्षक संघ की 35 मांग है. इसको लेकर संघ पिछले 1 महीने से आंदोलनरत है. अब 6 नवंबर को शिक्षा निदेशालय में तालाबंदी करने का भी ऐलान कर चुके हैं.

पिछले एक महीने से कभी शिक्षा निदेशालय में प्रोटेस्ट तो कभी स्कूलों में काली पट्टी बांधकर स्टूडेन्ट्स को पढ़ा रहे टीचर्स अब लोकसभा चुनाव में वोट नहीं करने की बात कह रहे हैं. प्रदेश के राजकीय शिक्षक संघ ने यह फैसला लिया है.

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शिक्षक संघ के अध्यक्ष राम सिंह चौहान का कहना है की कई दौर की मीटिंग हो चुकी है, लेकिन आज तक न तो शिक्षा मंत्री इस पर गंभीर हुए और न ही अधिकारी कोई फैसला ले पाए हैं, इसलिए ये फैसला लेने का मन बनाया गया है. शिक्षक संघ के इस फैसले ने पॉलिटिकल पॉर्टीज़ की टेँशन बढ़ा दी है.

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कांग्रेस इस मुद्दे को भुनाते हुए बीजेपी पर हमलावर है. कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल बिष्ट ने कहा कि सरकारी सेवा में जुड़े लोगों की मांग पर ध्यान न दिया जाना चाहिए और यह जरूरी है. वहीं, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का कहना है कि बीच का रास्ता जल्द निकालेंगे और इस पर मुख्यमंत्री से बात की जाएगी.

बहरहाल, अब उत्तराखंड प्रदेश के 20 हजार से ज्यादा टीचर्स और उनके परिवार के सदस्यों के वोट न करने की घोषणा से राजनीतिक दल पसोपेश में हैं. हालांकि, कहा तो जा रहा है कि कहीं न कहीं प्रेशर पॉलिटिक्स का गेम है जो अब राजनीतिक रंग ले रहा है.

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