ममता की मिसाल: माँ ने किडनी दान कर बचाई बेटे की जान; 4 साल के संघर्ष के बाद भुवन को मिला ‘नया जीवन’

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हल्द्वानी (12 मार्च 2026): कहते हैं कि माँ अपने बच्चे के लिए मौत से भी लड़ सकती है, और नैनीताल जिले के बेतालघाट की आनंदी देवी ने इसे सच कर दिखाया है। किडनी फेलियर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे अपने पुत्र भुवन चंद्र को उन्होंने अपनी किडनी देकर एक अनमोल उपहार दिया है।

1. 2021 से शुरू हुआ बीमारी का सफर

भुवन चंद्र की सेहत बिगड़ने का सिलसिला नवंबर 2021 में शुरू हुआ था।

  • शुरुआती लक्षण: पेट और किडनी में तेज दर्द के साथ लगातार उल्टी की शिकायत होने पर उन्होंने रामनगर के अस्पताल में जांच कराई।

  • निदान: अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में पता चला कि उनकी किडनी सिकुड़ गई है। इसके बाद अगले तीन साल तक भुवन ने कई अस्पतालों के चक्कर काटे, लेकिन सुधार नहीं हुआ।

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2. डायलिसिस से ट्रांसप्लांट तक का संघर्ष

वर्ष 2024 की शुरुआत में भुवन इलाज के लिए एम्स (AIIMS), दिल्ली पहुँचे।

  • डायलिसिस: एम्स में 10 दिन रुकने के बाद वे हल्द्वानी के बेस अस्पताल में डायलिसिस कराने लगे।

  • डॉक्टर की सलाह: जनवरी 2025 में डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया कि भुवन को बचाने का एकमात्र रास्ता किडनी ट्रांसप्लांट है।

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3. जब डोनर नहीं मिला, तो माँ बनी ‘जीवनरक्षक’

ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन कई संभावित डोनरों की प्रोफाइल मैच नहीं हुई। ऐसे नाजुक समय में 60 वर्षीय माँ आनंदी देवी ने बिना हिचकिचाए अपनी किडनी देने का फैसला किया।

  • सफल ऑपरेशन: सभी कानूनी और मेडिकल प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद, नवंबर 2025 में ट्रांसप्लांट सफल हुआ। माँ की किडनी बेटे के शरीर में सफलतापूर्वक काम करने लगी।

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Snapshot: संघर्ष और विजय की कहानी

विवरण जानकारी
पुत्र (प्राप्तकर्ता) भुवन चंद्र (निवासी बेतालघाट)
माँ (डोनर) आनंदी देवी
बीमारी का पता चला नवंबर 2021
ट्रांसप्लांट का समय नवंबर 2025
वर्तमान स्थिति माँ और बेटा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं

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