पिथौरागढ़ में रेबीज का खौफ: 20 दिन के भीतर दूसरे छात्र ने तोड़ा दम, ‘एक ही’ लावारिस पिल्ले ने दोनों किशोरों को बनाया था शिकार; गांव में दहशत

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पिथौरागढ़: उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ से एक बेहद चौंकाने वाली और दर्दनाक खबर सामने आई है। यहाँ धारचूला तहसील के जुम्मा गांव में रेबीज (Rabies) का संक्रमण मासूम बच्चों के लिए काल बन रहा है। पंडित बीडी पांडे जिला अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे आठवीं कक्षा के एक $14$ वर्षीय छात्र की इलाज के दौरान मौत हो गई। जिले में पिछले $20$ दिनों के भीतर रेबीज संक्रमण से यह दूसरी मौत है। सबसे हैरान और विचलित करने वाली बात यह है कि दम तोड़ने वाले दोनों किशोरों को करीब छह महीने पहले गांव के ही एक ही लावारिस श्वान (कुत्ते) के पिल्ले ने काटा था। इस दूसरी मौत के बाद से पूरे जुम्मा गांव और आसपास के क्षेत्रों में भारी दहशत का माहौल है।

अस्पताल में 16 घंटे चला इलाज; कभी सामान्य तो कभी आक्रामक हो रहा था छात्र

विधिक और स्वास्थ्य सूत्रों के अनुसार, मृतक छात्र की पहचान जुम्मा गांव निवासी युवराज सिंह धामी ($14$ वर्ष) पुत्र रवीन्द्र सिंह धामी के रूप में हुई है।

  • बुधवार को बिगड़ी थी तबीयत: युवराज को अचानक हवा और पानी से डर (Hydrophobia/Aerophobia) लगने लगा था और वह रुक-रुक कर आक्रामक व्यवहार करने लगा था। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे स्थानीय संयुक्त चिकित्सालय ले गए, जहाँ से गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।

  • दिल्ली भेजे गए सैंपल: जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने छात्र में रेबीज संक्रमण की विधिक पुष्टि की। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के अनुसार, छात्र का व्यवहार लगातार बदल रहा था— वह कभी बिल्कुल सामान्य हो जाता, तो कभी उसमें रेबीज के उग्र लक्षण उभर आते। इस विधिक स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसके सैंपल लेकर जांच के लिए दिल्ली भेजे और संक्रमण फैलने की सुरक्षा के मद्देनजर उसे आईसीयू (ICU) में पूरी तरह आइसोलेट कर दिया था। हालांकि, भर्ती होने के महज $16$ घंटे बाद ही किशोर ने दम तोड़ दिया।

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23 मई को हुई थी पहले दोस्त मोहित की मौत, एक पिल्ले ने 10 लोगों को काटा था

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, करीब छह महीने पहले जुम्मा गांव के तोक बुंगा और टीलम क्षेत्र में एक लावारिस श्वान के पिल्ले ने गांव के कई बच्चों और ग्रामीणों को काट लिया था, जिसकी कुछ समय बाद खुद ही मौत हो गई थी।

  • पहली मौत: इस पिल्ले के काटने का शिकार हुए गांव के ही एक अन्य किशोर मोहित धामी की बीती $23$ मई को तबीयत बिगड़ने के अगले ही दिन मौत हो गई थी।

  • 20 दिन बाद दूसरी मौत: मोहित की मौत के ठीक $20$ दिन बाद अब उसके दोस्त युवराज को भी अपनी जान गंवानी पड़ी है। बताया जा रहा है कि उस लावारिस पिल्ले ने गांव के कुल $10$ लोगों को अपना शिकार बनाया था, जिससे बाकी लोगों की जान पर भी विधिक संकट मंडरा रहा है।

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स्वास्थ्य विभाग अलर्ट; अन्य संदिग्धों की विधिक निगरानी शुरू

इस हृदयविदारक घटना के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) पिथौरागढ़ डॉ. एसएस नबियाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित जुम्मा गांव में स्वास्थ्य विभाग की एक विशेष टीम भेजी है। डॉ. नबियाल ने आधिकारिक विधिक बयान में कहा:

“रेबीज संक्रमण के कारण ही किशोर की मौत हुई है। चूंकि उस श्वान ने गांव के कई अन्य लोगों को भी काटा था, इसलिए विभाग बेहद सतर्क है। एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) के विधिक नियमों के तहत सभी प्रभावितों और संदिग्धों की गहन चिकित्सा निगरानी (Monitoring) की जा रही है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि किसी भी प्रकार के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टरों से संपर्क करें।”

डॉ. एसएस नबियाल, सीएमओ, पिथौरागढ़

इधर, ग्रामीणों का आरोप है कि श्वान के काटने के शुरुआती समय में यदि सही विधिक और चिकित्सकीय परामर्श के साथ एंटी-रेबीज का पूरा कोर्स कराया गया होता, तो शायद इन दो मासूमों की जान बचाई जा सकती थी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आवारा पशुओं के काटने को कतई हल्के में न लें और तत्काल विधिक रूप से एआरवी (ARV) का टीका लगवाएं क्योंकि रेबीज के लक्षण एक बार उभरने के बाद यह बीमारी शत-प्रतिशत जानलेवा हो जाती है।

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