मानव-वन्यजीव संघर्ष पर वन विभाग का कड़ा कदम: 13 गुलदारों और 3 भालुओं को मारने के आदेश जारी, एक दशक में 327 लोगों की जा चुकी है जान

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देहरादून। उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष पर काबू पाने के लिए वन विभाग ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। रिहाइशी इलाकों में लगातार घुसपैठ करने और जानलेवा हमले करने वाले वन्यजीवों से जनता की सुरक्षा के लिए विभाग ने 13 गुलदारों और 3 भालुओं को मारने के आदेश जारी किए हैं। हालांकि, इनमें से अब तक केवल एक गुलदार को पौड़ी जिले में मारा जा सका है।

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वन अधिकारियों के अनुसार, पिछले सात महीनों में राज्यभर में 118 खतरनाक वन्यजीवों को चिह्नित किया गया है, जिनमें 90 गुलदार, 21 बाघ और 8 भालू शामिल हैं। इनमें से मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा बने बाघों को ट्रैंकुलाइज़ कर पकड़ने के निर्देश दिए गए हैं। चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन की अनुमति से किसी वन्यजीव को मारने का निर्णय केवल अंतिम विकल्प के रूप में लिया जाता है, जब उसे खदेड़ने या पकड़ने के सभी प्रयास विफल हो जाते हैं।

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एक दशक के आंकड़े चिंताजनक

उत्तराखंड में पिछले दस वर्षों में वन्यजीवों के हमलों में 327 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 2015 से लेकर अब तक गुलदारों के हमले सबसे घातक साबित हुए हैं, जबकि हालिया वर्षों में बाघों के हमलों में भी तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2026 में ही अब तक बाघ के हमलों में 12 और गुलदार के हमलों में 16 लोगों की मौत हो चुकी है। वन विभाग का मानना है कि इस सख्त कार्रवाई से आबादी वाले क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित होगी और संघर्ष की घटनाओं में कमी आएगी।

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