झांसी से गिरफ्तार हुए कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू; SIT और पुलिस टीम पूछताछ के लिए लेकर देहरादून रवाना

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देहरादून। उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या से जुड़े उत्पीड़न, धोखाधड़ी और जान से मारने की साजिश के हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस और विशेष जांच टीम (SIT) को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने मामले में वांछित चल रहे मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू उर्फ ‘पप्पू गिरधारी’ को शनिवार (7 नवंबर) को उत्तर प्रदेश के झांसी से गिरफ्तार कर लिया है। वह पिछले कई दिनों से गिरफ्तारी से बचने के लिए वहां छिपकर रह रहे थे। गिरफ्तारी के बाद पुलिस और एसआईटी की संयुक्त टीम आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर देहरादून लाने की प्रक्रिया में जुट गई है।

देहरादून पहुंचते ही होगी गहन पूछताछ

देहरादून पहुंचने के बाद पुलिस और एसआईटी गिरधारी लाल साहू से पूरे मामले पर कड़ी पूछताछ करेगी। माना जा रहा है कि पूछताछ के दौरान इस मामले से जुड़े कई नए और अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।
यह पूरा मामला बेहद पेचीदा और गंभीर रूप ले चुका है। एक ओर जहां आरोपी गिरधारी लाल साहू ने वीडियो जारी कर खुद पर लगे आरोपों को नकारते हुए कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या पर ही भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे और अपनी जान को खतरा बताया था, वहीं दूसरी ओर मंत्री रेखा आर्या ने 15 अक्टूबर 2026 को देहरादून के कैंट थाने में पति के खिलाफ धोखाधड़ी, घरेलू हिंसा, पहली शादी की बात छिपाने और जान से मारने की धमकी देने की गंभीर धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई थी। मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही आरोपी लगातार फरार चल रहा था।

कोर्ट से खारिज हो चुकी हैं अग्रिम जमानत और FIR रद्द करने की याचिकाएं

मुकदमा दर्ज होने के बाद गिरधारी लाल साहू ने गिरफ्तारी से बचने के लिए देहरादून की विशेष अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन 19 अक्टूबर 2026 को अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
इसके बाद, 4 नवंबर को उत्तराखंड उच्च न्यायालय (नैनीताल) ने भी गिरधारी लाल साहू की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। हाईकोर्ट में अपनी याचिका के दौरान साहू ने आरोप लगाया था कि रेखा आर्या कैबिनेट मंत्री के पद पर हैं और वे अपने पद का दुरुपयोग कर उन्हें गिरफ्तार करवाना चाहती हैं। हालांकि, न्यायालय से कोई राहत न मिलने और गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद एसआईटी ने मुस्तैदी दिखाते हुए यूपी पुलिस के सहयोग से 7 नवंबर को उन्हें धर दबोचा।
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