हल्द्वानी हिंसा: बनभूलपुरा में कर्फ्यू में 17 घंटे की ढील, आरोपी अजाज कुरैशी की संपत्ति कुर्क

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हल्द्वानी के बनभूलपुरा इलाके में कर्फ्यू में ढील दी गई है. नैनीताल जिला प्रशासन ने रविवार को कहा कि प्रतिबंध अब केवल रात 10 बजे से सुबह 5 बजे के बीच ही रहेगा. जिला मजिस्ट्रेट वंदना सिंह द्वारा जारी एक आदेश के अनुसार अब बनभूलपुरा में सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक कर्फ्यू में 17 घंटे की ढील दी जाएगी.

अगले आदेश तक रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक रात्रि कर्फ्यू रहेगा.

इस बीच बनभूलपुरा हिंसा में नामजद आरोपी अजाज कुरैशी की संपत्ति भी रविवार को कुर्क कर ली गई. पुलिस ने बताया कि वह गोपाल मंदिर के पास नई बस्ती का रहने वाला है. इस हिंसा के सिलसिले में अब तक 58 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कथित मास्टरमाइंड अब्दुल मलिक और उसका बेटा अब्दुल मोइद अभी भी फरार हैं. मलिक ने मदरसा बनवाया था. उसके विध्वंस का पुरजोर विरोध किया था.

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हिंसा के मास्टरमाइंड अब्दुल मलिक की पत्नी सफ़िया मलिक ने विध्वंस प्रक्रिया को निलंबित करने की मांग करते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया है, लेकिन तत्काल राहत पाने में विफल रही हैं. मशहूर वकील सलमान खुर्शीद ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय में दलील पेश करते हुए कहा था कि उनके मुवक्किल को क्षेत्र में विध्वंस से पहले अदालत में जवाब दाखिल करने के लिए 15 दिन का समय दिया जाना चाहिए था.

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जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने हिंसा में मारे गए लोगों के लिए की नौकरी की मांग

प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने उत्तराखंड पुलिस पर हलद्वानी में “बर्बरता” का आरोप लगाया है. उनकी तरफ से मांग की गई है कि राज्य सरकार मारे गए लोगों के परिवारों को पर्याप्त मुआवजा और नौकरियां दे. जमीयत कार्य समिति की एक बैठक में मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि इस समय देश में हालात बहुत खतरनाक हैं. उन्होंने कहा, “नया संघर्ष पैदा करके मुसलमानों को भड़काने और हाशिए पर धकेलने की भी कोशिश की जा रही है.”

मौलाना अरशद मदनी ने कहा, ”हमने पूरे देश के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. लेकिन प्रतिष्ठित कानूनी विशेषज्ञ और सेवानिवृत्त न्यायाधीश भी अदालतों और विशेष रूप से सुप्रीम कोर्ट के आदेशों से निराश हैं. चाहे वह बाबरी मस्जिद हो या जामा मस्जिद ज्ञानवापी, या अनुच्छेद 370. हल्द्वानी में पुलिस ने क्रूरता की है. उत्तराखंड सरकार को पुलिस कार्रवाई में मारे गए लोगों के परिवारों को पर्याप्त मुआवजा और नौकरियां देनी चाहिए.”

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