हाईकमान के कड़े रुख के आगे झुके हरीश रावत: रद्द कीं अपनी सभी 9 ‘धन्यवाद यात्राएं’, समर्थकों से मांगी माफी

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देहरादून/नई दिल्ली। उत्तराखंड कांग्रेस में पिछले कई दिनों से जारी सियासी खींचतान और हाईकमान की सख्त हिदायत के बाद आखिरकार पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत को अपने कदम पीछे खींचने पड़े हैं। कांग्रेस आलाकमान के कड़े रुख के आगे झुकते हुए हरीश रावत ने अपनी प्रस्तावित सभी 9 ‘धन्यवाद एवं जन संवाद यात्राओं’ को रद्द करने का औपचारिक ऐलान कर दिया है। इसको लेकर हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा कर अपने समर्थकों और आयोजकों से असुविधा के लिए सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगी है।

पोस्ट में छलका दर्द: समर्थकों से मांगी माफी, पार्टी के सामूहिक अभियान की जताई उम्मीद

हरीश रावत ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि उन्होंने प्रदेशभर में 9 और ‘धन्यवाद यात्राएं’ प्लान की थीं, जिनके सफल संचालन और आयोजन के लिए स्थानीय कार्यकर्ताओं व नेताओं को जिम्मेदारियां भी सौंप दी गई थीं। लेकिन अब बदली परिस्थितियों के चलते उन सभी यात्राओं को स्थगित करना पड़ रहा है। रावत ने लिखा कि इस अचानक हुए फैसले से उनके समर्थकों और निष्ठावान आयोजकों को जो कष्ट पहुंचा है, उसके लिए वे हृदय से क्षमाप्रार्थी हैं। उन्होंने आगे उम्मीद जताते हुए लिखा कि, “मेरी पूरी कोशिश रहेगी कि मेरे इस व्यक्तिगत कार्यक्रम की तर्ज पर पार्टी भी पूरे प्रदेश में जनसंवाद का कोई आधिकारिक कार्यक्रम तय करे, ताकि मैं भी उसमें एक कार्यकर्ता के रूप में जुड़ सकूं। फिलहाल मैं इसके लिए प्रतीक्षा करूंगा।”

सैलजा के पत्र से शुरू हुआ था विवाद; वेणुगोपाल ने दी थी ‘वन मैन शो’ न चलाने की चेतावनी

उल्लेखनीय है कि गंभीर बीमारी से उबरने के बाद हरीश रावत ने हरिद्वार से ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ की शुरुआत की थी। इस दौरान उनके हरिद्वार से चुनाव लड़ने और समानांतर यात्रा निकालने के बयानों पर उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा ने 1 अक्टूबर को ही पत्र भेजकर सख्त आपत्ति जताई थी। सैलजा ने साफ कहा था कि पार्टी से अलग कोई भी व्यक्तिगत अभियान संगठन को नुकसान पहुंचाता है। इसके बावजूद जब यात्रा जारी रही, तो मामला दिल्ली दरबार तक पहुंच गया।
पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल ने मामले में सीधा हस्तक्षेप करते हुए हरीश रावत को कड़ा संदेश दिया। वेणुगोपाल ने स्पष्ट किया कि:
  • उत्तराखंड में सभी वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग राह पकड़ने के बजाय कांग्रेस के साझा बैनर तले मिलकर चुनाव प्रचार (Campaign) करना होगा।
  • पार्टी किसी भी नेता का ‘व्यक्तिगत अभियान’ बर्दाश्त नहीं करेगी।
  • सभी कार्यक्रमों का एकमात्र उद्देश्य कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में उत्तराखंड में पार्टी की जीत सुनिश्चित करना होना चाहिए।

7 और 8 अक्टूबर को दिल्ली में मुलाकातों का दौर

हाईकमान के इस कड़े फैसले और हिदायत के बाद हरीश रावत को दिल्ली तलब किया गया था। तय शेड्यूल के मुताबिक 7 और 8 अक्टूबर को नई दिल्ली में हरीश रावत की प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल के साथ उच्चस्तरीय बैठकें होनी थीं। हालांकि, दिल्ली में हुई इन बैठकों के भीतर के विवरण अभी सामने नहीं आए हैं, लेकिन बैठकों के तुरंत बाद हरीश रावत द्वारा यात्राएं रद्द करने के फैसले से यह साफ हो गया है कि कांग्रेस आलाकमान चुनाव से पहले अनुशासनहीनता और गुटबाजी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
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