उत्तराखंड में IVF तकनीक से साहीवाल गाय की कोख से जन्मी बद्री नस्ल की स्वस्थ बछिया, देशी नस्ल के संरक्षण में मिली बड़ी सफलता

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पंतनगर/देहरादून। उत्तराखंड में पशुपालन और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सफलता हासिल हुई है, जहां इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) तकनीक के माध्यम से एक साहीवाल गाय की कोख से उत्तराखंड की मूल ‘बद्री’ नस्ल की स्वस्थ बछिया का जन्म हुआ है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने शनिवार को इस उपलब्धि की आधिकारिक जानकारी दी। करनाल स्थित ICAR-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI) और जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के वैज्ञानिकों द्वारा ‘उत्तराखंड बायोटेक्नोलॉजी काउंसिल’ के वित्तीय सहयोग से यह प्रयोग सफल हुआ है। इस वैज्ञानिक उपलब्धि को उत्तराखंड की स्वदेशी बद्री गाय के संरक्षण, संवर्धन और उसकी नस्ल सुधार की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।
साल 2023 से जारी थी रिसर्च, जल्द क्रॉसब्रेड गाय भी देगी बद्री बछड़े को जन्म
मंत्रालय के अनुसार, यह शोध कार्य वर्ष 2023 में जीबी पंत विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति डॉ. एमएस चौहान के नेतृत्व में शुरू हुआ था। इस प्रक्रिया में अल्ट्रासाउंड-गाइडेड ओवम पिक-अप तकनीक से चुनिंदा बद्री गायों से अंडाणु एकत्र कर ‘उत्तराखंड पशुधन विकास बोर्ड’ के बद्री सांड के शुक्राणुओं से लैब में भ्रूण तैयार किया गया, जिसे साहीवाल गाय के गर्भ में रोपित किया गया था। वैज्ञानिकों की यह कोशिश यहीं खत्म नहीं हुई है; आने वाले 5 से 7 दिनों के भीतर एक क्रॉसब्रेड (संकर) गाय भी इसी आईवीएफ तकनीक के जरिए एक और बद्री बछड़े को जन्म देने वाली है, जिससे इस तकनीक की प्रभावशीलता और व्यापकता सिद्ध हो सकेगी।
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