उत्तराखंड में खनन विभाग की ऐतिहासिक पहल: समय पर खुलीं गौला-शारदा नदियां, 5 साल में कमाया ₹3859 करोड़ राजस्व; 7 लाख लोगों को मिला रोजगार
लालकुआं/देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड खनन विभाग ने इस वर्ष पर्यावरण संरक्षण, पारदर्शी व्यवस्था और राजस्व वृद्धि के मोर्चे पर अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। विभाग की सजगता के चलते इस बार कुमाऊं की जीवनरेखा कही जाने वाली गौला, शारदा और नंधौर समेत तमाम नदियों को समय पर चुगान (खनन) के लिए खोल दिया गया। समय रहते सर्वे और वैज्ञानिक पद्धति से उपखनिज निकासी का लक्ष्य बढ़ाए जाने के कारण इस सीजन में कारोबारियों को आंदोलन की राह नहीं पकड़नी पड़ी और सुचारू रूप से चुगान कार्य चलता रहा। पट्टों के समय पर आवंटन से जहां आम जनता को निर्माण सामग्री सस्ती दरों पर मिल रही है, वहीं नदियों के किनारों पर होने वाला भू-कटाव भी काफी कम हुआ है।
7 लाख परिवारों की आजीविका को मिला संबल, स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत
खनन विभाग की इन नीतिगत सुधारों और सक्रियता का सबसे बड़ा लाभ प्रदेश के युवाओं और श्रमिकों को मिला है। विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में राज्य के भीतर परिवहन, स्टोन क्रेशर उद्योग, डंपर व वाहन संचालन, पोकलैंड-जेसीबी मशीन संचालन, प्रत्यक्ष श्रमिक कार्य तथा अन्य सहायक व्यापारिक गतिविधियों के माध्यम से लगभग 7 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है। इससे न केवल हजारों परिवारों की आजीविका सुरक्षित हुई है, बल्कि उत्तराखंड की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी भारी मजबूती मिली है।
राजस्व संग्रहण में रचा इतिहास: 5 वर्षों में कमाए ₹3,859.79 करोड़
ई-नीलामी व्यवस्था, तकनीकी नवाचार और पारदर्शी नीतियों के चलते खनन विभाग ने पिछले पांच वर्षों में रिकॉर्ड राजस्व अर्जित किया है। वित्तीय वर्ष 2021-22 से लेकर 2025-26 तक विभाग ने कुल ₹3,859.79 करोड़ का राजस्व सरकारी खजाने में जमा किया है।
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वर्ष 2025-26 का रिकॉर्ड प्रदर्शन: बीते वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग ने ₹950 करोड़ के निर्धारित लक्ष्य को कहीं पीछे छोड़ते हुए ₹1,126.54 करोड़ का ऐतिहासिक राजस्व अर्जित किया।
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वर्ष 2024-25 की स्थिति: इससे पूर्व के वर्ष में भी विभाग ने ₹1,040.57 करोड़ की शानदार आय प्राप्त की थी, जो तय लक्ष्य से काफी अधिक थी।
अवैध खनन माफियाओं पर कड़ा प्रहार: 10 हजार से अधिक मामले दर्ज, ₹195 करोड़ वसूले
सख्त चेकिंग और तकनीकी निगरानी (सैटेलाइट व ड्रोन सर्विलांस) का नतीजा है कि विभाग ने पिछले 5 वर्षों में अवैध खनन के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। इस अवधि में कुल 10,605 अवैध खनन के प्रकरण दर्ज किए गए, जिनसे जुर्माने और जब्ती के रूप में लगभग ₹195.50 करोड़ की रिकॉर्ड वसूली कर राजस्व में जोड़ा गया। इस सख्त रुख से अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगा है।
शीर्ष नेतृत्व के मुख्य वक्तव्य
“हमारी सरकार ने खनन नीति का सरलीकरण करते हुए पट्टों के आवंटन की पूरी प्रक्रिया को ई-नीलामी के माध्यम से पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाया है। सरकार की साफ मंशा है कि पर्यावरण संतुलन और नियमों को ध्यान में रखते हुए केवल वैज्ञानिक विधि से ही खनन कार्य संचालित हों। इससे स्थानीय लोगों को राज्य में ही अधिकाधिक रोजगार मिलने के साथ-साथ आम जनता को भवन निर्माण सामग्री बेहद सस्ती और सुलभ दरों पर उपलब्ध हो पा रही है।”
— पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड
“शासन की ओर से हमें नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹1,500 करोड़ का बड़ा राजस्व लक्ष्य मिला है। इस नए लक्ष्य को शत-प्रतिशत पूरा करने के लिए विभाग ने अभी से अपनी कमर कस ली है और कार्ययोजना पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही, राज्य में अवैध खनन को पूरी तरह शून्य (पूर्ण अंकुश) करने के लिए हमारी टीमें पूरी गंभीरता और मुस्तैदी से काम कर रही हैं।”
— राजपाल लेघा, निदेशक, खनन विभाग (उत्तराखंड)
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