नौ साल बाद अंडरपास निर्माण की जगी उम्मीद, रेलवे-राजस्व विभाग की बैठक पर टिकी सबकी नजर

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इस हफ्ते होगी रेलवे-प्रशासन की निर्णायक बैठक, जमीन का पेंच सुलझा तो दौड़ेगा विकास का पहिया

राजू अनेजा,काशीपुर। शहर की सबसे बड़ी और वर्षों पुरानी मांगों में शामिल महाराणा प्रताप चौक अंडरपास अब हकीकत बनने की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। करीब 9 साल से अधूरी पड़ी इस योजना को लेकर प्रशासन हरकत में आ गया है। इस सप्ताह रेलवे और राजस्व विभाग के अधिकारियों की अहम बैठक प्रस्तावित है, जिसमें भूमि विवाद का समाधान तलाशा जाएगा। यदि सहमति बनती है तो अंडरपास निर्माण का रास्ता साफ हो सकता है।

 

2017 में मिला था वादा, आज तक नहीं बना अंडरपास

वर्ष 2017 में महाराणा प्रताप चौक से बाजपुर रोड तक रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) का निर्माण शुरू हुआ था। आरओबी बनने के बाद रोडवेज बस स्टेशन के पास स्थित रेलवे फाटक को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया। उस समय लोगों को भरोसा दिलाया गया था कि आवागमन आसान बनाने के लिए आरओबी के पास अंडरपास बनाया जाएगा, लेकिन नौ साल बीतने के बाद भी यह वादा धरातल पर नहीं उतर सका।

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केडीएफ के संघर्ष ने फिर दिलाई रफ्तार

काशीपुर डेवलपमेंट फोरम (केडीएफ) लगातार इस मुद्दे को उठाता रहा है। हाल ही में 29 जून को फोरम ने एसडीएम को ज्ञापन देकर अंडरपास निर्माण की मांग दोहराई। इसके बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए रेलवे अधिकारियों के साथ बैठक की तैयारी शुरू कर दी है।

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116 साल पुराने रिकॉर्ड बने सबसे बड़ी बाधा

 

एसडीएम अभय प्रताप सिंह के अनुसार, रेलवे और राजस्व विभाग के अभिलेखों में भूमि दर्ज है, लेकिन दोनों के नक्शों में अंतर है। वर्ष 1910 में रेलवे क्रॉसिंग के लिए हुए भूमि अधिग्रहण के रिकॉर्ड और वर्तमान नक्शों में भिन्नता होने से निर्माण कार्य अटका हुआ है। इसी विवाद को सुलझाने के लिए इस सप्ताह रेलवे अधिकारियों के साथ बैठक होगी।

अब शहर की नजर इस बैठक पर

यदि रेलवे और प्रशासन के बीच भूमि विवाद का समाधान निकल जाता है तो महाराणा प्रताप चौक अंडरपास का वर्षों पुराना सपना आखिरकार साकार होने की दिशा में बढ़ जाएगा। शहरवासियों की निगाहें अब इस सप्ताह होने वाली बैठक पर टिकी हैं, जिससे काशीपुर को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।