राहुल गांधी ने कैसे पलटी बाजी, भाजपा के सामने कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक गठबंधन को लाये मुकाबले में, जानिए पूरी कहानी

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी 2024 के लोकसभा चुनाव परिणामों में पार्टी और विपक्षी गठबंधन इंडिया को सफलता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे पहले साल साल 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी जहां 52 सीटों पर सिमट गई थी, लेकिन इस बार राहुल गांधी की करिश्माई अगुवाई में पार्टी 99 सीटें हासिल करने में कामयाब रही।

समाचार वेबसाइट हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार राहुल गांधी ने अपनी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ और ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के जरिये पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत किया है। दोनों यात्राएं 10,000 किलोमीटर तर रही और ज्यादातर यात्रा पैदल की गई, जिसके कारण राहुल गांधी सीधे जनता के सीधे संपर्क में आ गए और उन्होंने खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने खुद को मुख्य चुनौती के रूप में पेश किया।

राहुल गांधी की दो यात्राओं ने कई मायनों में 2024 के चुनाव के लिए कांग्रेस के अभियान की नींव रखी और राहुल गांधी को उनकी पिछली विफलताओं के बावजूद चुनावी लड़ाई के केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया।

बीते मंगलवार को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद राहुल गांधी ने संविधान की प्रति के साथ लोकतंत्र को बचाने के लिए देश के लोगों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कांग्रेस मुख्यलय में किये प्रेस कांफ्रेंस में कहा, “भारत के लोगों ने संविधान और लोकतंत्र को बचाया है। देश की वंचित और गरीब आबादी अपने अधिकारों की रक्षा के लिए इंडिया गठबंधन उनके साथ खड़ी है।”

2009 और 2014 दोनों में राजनीतिक प्रतिकूलताओं और चुनावी असफलताओं के बीच राहुल गांधी ने इस चुनाव में सुनिश्चित किया कि उनसे पुरानी किसी तरह की कोई चूक न हो। 2024 के लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान राहुल गांधी का ध्यान उन मुद्दों पर केंद्रित था जो लोगों के लिए मायने रखते थे। इसके साथ ही राहुल की वाक कला और युवा मतदाताओं को लुभाने के लिए नई सोशल मीडिया रणनीति ने भी बखूबी काम किया।

उन्होंने सोशल प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो डाला, जिसमें वो महात्मा गांधी की एक पेंटिंग के सामने बैठे हैं और उन्होंने कांग्रेस को काला धन मिलने के पीएम मोदी के दावों को खारिज कर दिया।

उन्होंने नरेंद्र मोदी से व्यंग्य भरे लहजे में पूछा, “मोदी जी, क्या आपने अपने अनुभव से बात की?”

राहुल के एक करीबी सहयोगी नेता ने कहा, “आप उनके भाषणों में एक दिलचस्प पहलू देखेंगे। उन्होंने कभी भी नेहरू या इंदिरा या राजीव का जिक्र नहीं किया। प्रियंका गांधी वाड्रा कभी-कभी अपनी पारिवारिक जड़ों का जिक्र करती हैं, लेकिन राहुल ने कभी नहीं किया।”

उन्होंने अपनी पुरानी छवि को भी त्याग दिया है। कांग्रेस नेता ने कहा, “राहुल गांधी के भाषणों के केंद्र में आम आदमी है। वह खुलकर लोगों से मिलते हैं, उन्हें गले लगाते हैं या सेल्फी लेते हैं। यह दिखाता है कि वो राजनीतिक रणनीति के तौर पर नरेंद्र मोदी से कितने अलग हैं।”

पिछले साल मार्च में सूरत की एक अदालत द्वारा आपराधिक मानहानि मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद राहुल गांधी ने लोकसभा से अपनी सदस्यता खो दी थी। तीन महीने बाद वह लोकसभा में लौटे।

तब से उनके भाषण संविधान को बचाने और पीएम मोदी की आलोचना पर केंद्रित रहे हैं।

राहुल गांधी ने 28 मई को आयोजित एक रैली में कहा था, “नरेंद्र मोदी और भाजपा का अंतिम उद्देश्य बाबा साहेब के संविधान को समाप्त करना और वंचितों से अधिकार और आरक्षण छीनना है। एक तरफ अंधे निजीकरण को हथियार के रूप में इस्तेमाल करके सरकारी नौकरियों को खत्म किया जा रहा है, जो पिछले दरवाजे से आरक्षण को खत्म करने का एक तरीका है।”

24 मई को उन्होंने मोदी सरकार के अग्निपथ योजना पर हमला बोलते हुए कहा था, “देशभक्ति की गाड़ी’ में सवार होकर युवाओं की पीड़ा को करीब से जाना। नरेंद्र मोदी ने देश की सेवा करने का सपना देखने वाले युवाओं को धोखा दिया है। उन्होंने सेना और उन पर जबरन अग्निपथ योजना थोप दी है।”

वायनाड और रायबरेली दोनों लोकसभा सीटें जीतने के बाद राहुल गांधी के सामने किसी एक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव करना मुश्किल भरा फैसला है और शायद इसलिए उन्होंने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ”मैं वायनाड या रायबरेली सीट के बारे में दूसरों से सलाह लूंगा, उसके बाद अंतिम फैसला करूंगा।”