काशीपुर में नकली लाइसेंस से असली हथियार खरीदने का चल रहा था खेल, एसटीएफ ने ऐसे किया भंडाफोड़

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शाहजहांपुर के नाम पर बनाए गए फर्जी लाइसेंसों से खरीदे हथियार, वर्षों तक करते रहे इस्तेमाल

राजू अनेजा,काशीपुर। उत्तराखंड में फर्जी शस्त्र लाइसेंसों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने काशीपुर से जुड़े एक बड़े खेल का खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि कुछ लोगों ने उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के नाम पर फर्जी शस्त्र लाइसेंस तैयार कराए और उन्हीं के आधार पर असली हथियार खरीदकर वर्षों तक उनका इस्तेमाल करते रहे। मामले में 10 लोगों के खिलाफ काशीपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है।

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि प्रदेशभर में बाहरी राज्यों से ट्रांसफर होकर आए शस्त्र लाइसेंसों के सत्यापन अभियान के दौरान यह मामला सामने आया। जांच में पता चला कि आरोपितों ने शाहजहांपुर से जारी दर्शाए गए शस्त्र लाइसेंसों के आधार पर काशीपुर गन हाउस से हथियार खरीदे थे।

 

सत्यापन में खुल गई पूरी पोल

 

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एसटीएफ ने जब संबंधित शस्त्र लाइसेंसों का शाहजहांपुर जिला प्रशासन से सत्यापन कराया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जिन लाइसेंस नंबरों का इस्तेमाल हथियार खरीदने में किया गया था, वे संबंधित व्यक्तियों के नाम पर जारी ही नहीं हुए थे। लाइसेंस नंबर दूसरे लोगों के नाम दर्ज पाए गए। इसके बाद एसटीएफ को बड़े फर्जीवाड़े की आशंका हुई और विस्तृत जांच शुरू की गई।

 

 

फर्जी पते बनाकर तैयार किए दस्तावेज

 

जांच में सामने आया कि आरोपितों ने सुनियोजित तरीके से अपने पहचान पत्रों और अन्य अभिलेखों में शाहजहांपुर का स्थानीय पता दर्ज कराया। इसके बाद कूटरचित दस्तावेज तैयार कर शस्त्र लाइसेंसों को वैध दिखाया गया। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर हथियार खरीदे गए और लंबे समय तक उनका इस्तेमाल किया जाता रहा।

इन लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा

 

 

मामले में नौशाद हुसैन, नसीम, दानिश उर्फ दानु, सौरभ अग्रवाल, विशाल राजपूत, गुरताज सिंह, जतिन कांडपाल, मनजोत सिंह, अजीम और गौरव अग्रवाल के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

हजारों लाइसेंसों की जांच के बीच मिला बड़ा सुराग

एसटीएफ निरीक्षक एमपी सिंह की अगुवाई में पिछले दो माह से बाहरी राज्यों से उत्तराखंड में स्थानांतरित हुए हजारों शस्त्र लाइसेंसों का गोपनीय सत्यापन किया जा रहा है। इसी दौरान काशीपुर से जुड़ा यह मामला सामने आया। एसटीएफ को आशंका है कि फर्जी शस्त्र लाइसेंसों का नेटवर्क काफी बड़ा हो सकता है और जांच के दौरान कई अन्य मामलों का भी खुलासा हो सकता है।

पहले भी जेल जा चुके हैं आरोपी

एसटीएफ इससे पहले भी फर्जी शस्त्र लाइसेंस प्रकरण में दो आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। उनके कब्जे से फर्जी लाइसेंस और अवैध सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल बरामद हुई थी। इसी कड़ी में अब यह नया मामला सामने आया है।

गिरफ्तारी के लिए संयुक्त टीम मैदान में

नए मामले में नामजद और वांछित आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ कुमाऊं और ऊधम सिंह नगर पुलिस की संयुक्त टीम गठित कर दी गई है। पुलिस टीमों को आरोपितों की तलाश में लगाया गया है। एसटीएफ का कहना है कि फर्जी लाइसेंसों के सहारे हथियार रखने वालों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

एसटीएफ की रडार पर फर्जी लाइसेंस धारक

बाहरी राज्यों से फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनवाकर उत्तराखंड में हथियार रखने वाले सभी लोग एसटीएफ की निगरानी में हैं। सत्यापन अभियान लगातार जारी है और जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभा‌वना जताई जा रही है।

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