काशीपुर : डेरी चलाने वाले पति ने दूध बचाने को घर में रखा था प्रतिबंधित केमिकल, पत्नी ने पानी समझकर गटक लिया

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राजू अनेजा,काशीपुर। शहर में दूध के कारोबार से जुड़ा एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। डेरी चलाने वाले एक युवक द्वारा घर में रखा गया प्रतिबंधित केमिकल उसकी पत्नी के लिए जानलेवा साबित होते-होते बचा। महिला ने बोतल में रखा हाइड्रोजन पेरोक्साइड (H₂O₂) पानी समझकर पी लिया, जिसके कुछ ही देर बाद उसकी हालत बिगड़ गई। परिजन उसे तत्काल एलडी भट्ट राजकीय उप जिला चिकित्सालय लेकर पहुंचे, जहां से गंभीर हालत में हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।

मामला कटोराताल क्षेत्र का बताया जा रहा है। महिला के पति ने बताया कि उसने करीब तीन माह पहले ही दूध की डेरी शुरू की थी। भीषण गर्मी में दूध को खराब होने से बचाने के लिए उसने घर में हाइड्रोजन पेरोक्साइड लाकर रखा था। इसी दौरान उसकी पत्नी ने अनजाने में उसे पानी समझकर गटक लिया।

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आर्थिक तंगी में शुरू की थी डेरी

 

पति ने बताया कि परिवार पहले से आर्थिक संकट से गुजर रहा है। उसकी नौ साल की बेटी लंबे समय से बीमार रहती है और हर महीने इलाज में काफी खर्च होता है। पहले वह एक निजी कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता था, लेकिन घर की हालत सुधारने के लिए उसने डेरी का काम शुरू किया था।

 

दूध बचाने के नाम पर खतरनाक खेल!

 

जानकारों के मुताबिक कुछ लोग दूध को लंबे समय तक फटने और खट्टा होने से बचाने के लिए अवैध रूप से हाइड्रोजन पेरोक्साइड का इस्तेमाल करते हैं। करीब 50 लीटर दूध में इसकी कुछ बूंदें मिलाने से दूध जल्दी खराब नहीं होता। हालांकि खाद्य सुरक्षा मानकों के तहत भारत में दूध में इस रसायन का प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है।

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शरीर के लिए कितना खतरनाक?

 

सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल के अनुसार हाइड्रोजन पेरोक्साइड का सेवन बेहद खतरनाक और जानलेवा हो सकता है। यह शरीर के अंदर पहुंचकर तेजी से ऑक्सीजन गैस बनाता है, जिससे पेट और आंतों में गंभीर जलन, अंदरूनी क्षति, यहां तक कि नसों में गैस के बुलबुले बनने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

 

खाद्य विभाग बोला— जांच जारी

 

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खाद्य निरीक्षक अपर्णा शाह ने बताया कि डेरियों और मिठाई प्रतिष्ठानों की समय-समय पर जांच की जाती है। दूध, दही और मिठाइयों के सैंपल भी लिए जाते हैं। फिलहाल जांच में हाइड्रोजन पेरोक्साइड मिलने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विभाग सतर्क है।

 

सवाल बड़ा है

दूध बचाने के नाम पर आखिर प्रतिबंधित केमिकल घरों और डेरियों तक कैसे पहुंच रहा है? और अगर गलती से सेवन जानलेवा हो सकता है, तो क्या खाद्य विभाग की निगरानी पर्याप्त है?

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