
राजू अनेजा,काशीपुर।श्री दुर्गा मंदिर का वार्षिकोत्सव इस वर्ष भी श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ बड़ी ही धूमधाम से मनाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर माता रानी के चरणों में हाजिरी लगाई। जैसे ही आयोजन की शुरुआत हुई, पूरा क्षेत्र “जय माता दी” के जयघोष से गूंज उठा। मंदिर परिसर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।
हवन-पूजन और यज्ञ के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत विधि-विधान के साथ हवन, पूजन और यज्ञ से हुई। श्रद्धालुओं ने माता रानी के चरणों में आहुति देकर सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद श्री दुर्गा जागरण मंडली द्वारा भव्य माता की चौकी का आयोजन किया गया, जिसने पूरे माहौल को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।
माता की चौकी में रातभर झूमे श्रद्धालु
दूर-दराज से पहुंचे भजन गायकों ने अपनी मधुर और जोशीली प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि श्रद्धालु देर रात तक भजनों पर झूमते रहे। भक्ति गीतों की धुन और “जय माता दी” के जयकारों ने पूरे मंदिर परिसर को ऊर्जा और उत्साह से भर दिया।
राधा-कृष्ण की झांकी बनी आकर्षण का केंद्र
इस अवसर पर स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत मनमोहक झांकियों ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। विशेष रूप से राधा-कृष्ण की जीवंत झांकी ने सभी का दिल जीत लिया। कलाकारों की प्रस्तुति इतनी प्रभावशाली रही कि श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो उठे और तालियों की गूंज से पंडाल गूंज उठा।
भव्य सजावट ने मोहा श्रद्धालुओं का मन
पूरे मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी झालरों और फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था। हर कोना आस्था और सुंदरता से सराबोर नजर आया। सजावट की भव्यता ने श्रद्धालुओं को आकर्षित किया और आयोजन को और भी खास बना दिया।
जनप्रतिनिधियों और गणमान्य लोगों की रही मौजूदगी
आयोजन में क्षेत्र के तमाम जनप्रतिनिधियों, गणमान्य लोगों और समाजसेवियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। भारी संख्या में पहुंचे भक्तों ने माता रानी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
विशाल भंडारे के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के अंत में विशाल भंडारे और प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया। हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर माता का आशीर्वाद लिया और आयोजन को सफल बनाया।
समाजसेवी सुरेंद्र छाबड़ा ने किया भव्य स्वागत
प्रमुख समाजसेवी सुरेंद्र छाबड़ा ने कार्यक्रम में पहुंचे सभी श्रद्धालुओं का भव्य स्वागत किया। उन्होंने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी वार्षिकोत्सव को पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया है। ऐसे आयोजन समाज में एकता, भाईचारे और संस्कृति को मजबूती देते हैं।
आस्था, उल्लास और परंपरा का अद्भुत संगम
पूरे आयोजन ने यह साबित कर दिया कि काशीपुर में धार्मिक परंपराओं के प्रति लोगों की आस्था आज भी उतनी ही मजबूत है। भक्ति, संगीत और उल्लास से सजी यह रात श्रद्धालुओं के लिए एक यादगार अनुभव बन गई।

