
सौंदर्यीकरण पर खर्च, लेकिन जरूरी दवाइयों के लिए भटक रहे मरीज
राजू अनेजा, काशीपुर। स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े दावों के बीच काशीपुर का एलडी भट्ट राजकीय उप जिला चिकित्सालय खुद “बीमार” नजर आ रहा है। यहां दवाइयों की किल्लत लगातार गहराती जा रही है। एंटी रेबीज इंजेक्शन की कमी के बाद अब कफ सिरप तक अस्पताल में उपलब्ध नहीं है, जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
हैरानी की बात यह है कि एक ओर अस्पताल प्रशासन इमरजेंसी कक्षों के सौंदर्यीकरण पर लाखों रुपये खर्च कर रहा है, वहीं दूसरी ओर मरीजों को बुनियादी दवाइयां भी नसीब नहीं हो पा रही हैं। कफ सिरप, टेटनस (टीटी) इंजेक्शन, बच्चों का आयरन सिरप और दर्द निवारक मरहम जैसी जरूरी दवाएं स्टॉक से बाहर हैं।
काशीपुर का यह अस्पताल न सिर्फ शहर बल्कि जसपुर, बाजपुर, रामनगर और उत्तर प्रदेश के बिजनौर तक के मरीजों का प्रमुख सहारा है। ऐसे में दवाइयों की कमी का असर व्यापक स्तर पर देखने को मिल रहा है।
महुआखेड़ा गंज निवासी जाहिद ने बताया कि कुत्ते के काटने के बाद अस्पताल पहुंचे, लेकिन एंटी रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं था। मजबूरन उन्हें बाहर से इंजेक्शन खरीदना पड़ा। वहीं ग्राम जुड़का निवासी सोमपाल ने बताया कि डॉक्टर द्वारा लिखी गई कफ सिरप अस्पताल में नहीं मिली, जिससे उन्हें बाजार का रुख करना पड़ा।
बड़ा सवाल:
जब अस्पताल में जीवनरक्षक दवाइयों का ही अभाव है, तो क्या सौंदर्यीकरण पर खर्च प्राथमिकता होना चाहिए?
“अस्पताल में कुछ दवाइयां खत्म हो गई हैं। इंडेंट बनाकर भेज दिया गया है। सोमवार को मुख्यालय से दवाइयां मंगवाई जाएंगी।”
— डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, ऊधमसिंह नगर
स्वास्थ्य सेवाओं की यह हकीकत सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर रही है। अब देखना होगा कि दवाइयों की किल्लत कब तक दूर होती है या मरीज यूं ही परेशान होते रहेंगे।
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