हल्द्वानी में बनेगा कुमाऊं का पहला हाईटेक आरटीओ परिसर: ₹35.69 करोड़ का बजट मंजूर, सेंसरयुक्त ड्राइविंग ट्रैक से होगा टेस्ट
हल्द्वानी। शहर में अत्याधुनिक क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) के निर्माण की कवायद तेज हो गई है। शासन द्वारा परियोजना के लिए 35.69 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट स्वीकृत किए जाने के बाद विभाग ने नए तीन मंजिला हाईटेक परिसर और सेंसरयुक्त ड्राइविंग ट्रैक के निर्माण का रास्ता साफ कर दिया है। इसके लिए वर्तमान आरटीओ कार्यालय को अस्थायी रूप से एक किराए के भवन में शिफ्ट करने की तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू कर दी गई हैं, ताकि पुराने ढांचे को ध्वस्त कर जल्द से जल्द नए भवन का निर्माण कार्य शुरू किया जा सके।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, शिफ्टिंग और निर्माण अवधि के दौरान आम जनता को मिलने वाली कोई भी विभागीय सेवा बाधित नहीं होगी। इसके लिए मुकम्मल वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है और नए अस्थायी परिसर के पास ही ड्राइविंग टेस्ट की भी व्यवस्था की जाएगी। आरटीओ (प्रशासन) डॉ. गुरदेव सिंह ने बताया कि नया परिसर परिवहन विभाग की सेवाओं को अधिक आधुनिक, सुगम और पारदर्शी बनाएगा। विशेष रूप से सेंसरयुक्त ट्रैक शुरू होने से केवल योग्य चालकों को ही ड्राइविंग लाइसेंस मिल सकेगा, जिससे भविष्य में सड़क सुरक्षा को भी काफी मजबूती मिलेगी।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं और तकनीक
देहरादून के बाद यह उत्तराखंड का दूसरा और पूरे कुमाऊं मंडल का पहला ऐसा आरटीओ कार्यालय होगा, जहां पूरी तरह तकनीक आधारित सेंसरयुक्त ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक (Automated Driving Test Track) विकसित किया जाएगा। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
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तकनीकी मूल्यांकन: ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदकों को आठ अलग-अलग कठिन मानकों पर खरा उतरना होगा। टेस्ट के दौरान वाहन की हर छोटी-बड़ी हरकत पर आधुनिक सेंसर पैनी नजर रखेंगे।
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पारदर्शिता: सेंसर की ऑटोमैटिक जनरेटेड रिपोर्ट के आधार पर ही कंप्यूटर तय करेगा कि आवेदक पास है या फेल। इससे मानवीय हस्तक्षेप और किसी भी प्रकार की पैरवी या सोर्स-सिफारिश की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
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सुरक्षा और मॉनिटरिंग: पूरे हाईटेक परिसर की रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए एक अत्याधुनिक मिनी कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा। सुरक्षा के लिहाज से पूरा भवन चौबीसों घंटे सीसीटीवी कैमरों की कड़े पहरे में रहेगा।
“परियोजना को शासन से अंतिम स्वीकृति मिल चुकी है। वर्तमान आरटीओ कार्यालय के अस्थायी भवन में स्थानांतरित होते ही पुराने ढांचे को ध्वस्त करने की कार्रवाई की जाएगी, जिसके तुरंत बाद निर्माण एजेंसी नए आधुनिक भवन का काम अपने हाथ में ले लेगी।”
— एसपी बड़ोनी, सहायक अभियंता, उत्तराखंड पेयजल निगम (निर्माण एजेंसी)


